शोभना शर्मा। हर वर्ष दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस (धनत्रयोदशी) इस साल 18 अक्टूबर, शनिवार को है। पंचांग अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 बजे तक चलेगी। कुछ लोग गलती से अगले दिन 19 तारीख को मनाने की सलाह देते हैं, लेकिन चूंकि प्रदोष काल (जिसमें पूजा की जाती है) शाम को होता है और त्रयोदशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर में ही समाप्त हो जाती है, इसलिए पूजा 19 को नहीं हो सकती। इसीलिए 18 अक्टूबर को ही पूजा व खरीदारी की जानी चाहिए।
प्री-दीपावली : इस धनतेरस पर खरीदारी और पूजा का शुभ समय
धनतेरस की शाम माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है — समय: शाम 07:16 बजे से रात्रि 08:20 बजे तक। यह लगभग 1 घंटा 4 मिनट का समय है जिसमें पूजा करना और खरीदारी करना शुभ माना जाता है। भारत की कई पंचांग-स्रोतों में यह समय 07:29 बजे से 08:20 बजे के बीच या इसी आसपास बताया गया है, जो थोड़ा भिन्न हो सकते हैं स्थानानुसार। प्रदोष काल भी इस दिन शाम 05:48 बजे से 08:19 बजे तक रहेगा, जो पूजा और धार्मिक क्रियाओं के लिए अनुकूल माना जाता है।
पूजा करने की विधि और महत्त्व
धनतेरस सिर्फ धन की पूजा का दिन नहीं बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन पूजा निम्न देवताओं की होती है —
माँ लक्ष्मी — समृद्धि और धन की देवी
भगवान कुबेर — धन के स्वामी
भगवान धन्वंतरि — चिकित्सा एवं स्वास्थ्य का देवता
पूजा विधि:
पूजा स्थान को स्वच्छ और सुशोभित रखें।
एक कलश सजाएँ, उसमें गंगाजल, अक्षत, सिक्के, फूल आदि रखें।
लक्ष्मी-कुबेर जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीप प्रदान करें और मंत्रों का जाप करें।
पूजा के बाद सोना, चांदी, बर्तन इत्यादि खरीदें, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।
खरीदारी की शुभता और परंपरा
धनतेरस पर सोना-चांदी, नए बर्तन, गृहस्थ उपयोगी सामान आदि खरीदने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई खरीदी धन वृद्धि और समृद्धि लाती है। लेकिन ध्यान रखें — कर्ज़ लेना या ऋण देना इस दिन अपशुभ माना जाता है। इस वर्ष धनतेरस 2025 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि दोपहर 12:18 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को 1:51 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए शुभ समय शाम 07:16 से 08:20 बजे तक निर्दिष्ट किया गया है। इस समय का ध्यान रखते हुए आप पूजा और खरीदारी दोनों को धार्मिक और शुभ तरीके से कर सकते हैं।


