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परिसीमन के बाद राजस्थान में 270 सीटों का संकेत, बोले देवनानी

परिसीमन के बाद राजस्थान में 270 सीटों का संकेत, बोले देवनानी

राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उदयपुर दौरे के दौरान प्रदेश की राजनीति, विधानसभा व्यवस्था और भविष्य में होने वाले परिसीमन को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। पेसिफिक यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए देवनानी ने कहा कि देश में लंबे समय से जनगणना और सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया नहीं हुई है, जबकि बदलती आबादी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए यह अब आवश्यक हो गया है। उनके बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि उन्होंने संकेत दिया कि परिसीमन के बाद राज्य में विधानसभा सीटों की संख्या 200 से बढ़कर 270 तक पहुंच सकती है।

देवनानी ने कहा कि वर्ष 2011 के बाद से देश में नई जनगणना नहीं हुई है। इसी तरह लंबे समय से संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण भी नहीं किया गया है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व बेहद जरूरी है, इसलिए परिसीमन समय पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब आबादी बढ़ती है, नए शहर बसते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तार होता है और जनसंख्या का वितरण बदलता है, तब निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलन बनाए रखने के लिए परिसीमन अनिवार्य हो जाता है।

राजस्थान के संदर्भ में देवनानी का बयान बेहद अहम माना जा रहा है। वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में 200 विधायक हैं, लेकिन यदि परिसीमन लागू होता है तो यह संख्या 270 तक पहुंच सकती है। इसका अर्थ यह होगा कि प्रदेश के कई जिलों और क्षेत्रों में नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है और बड़े भौगोलिक क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से विभाजित किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जयपुर स्थित विधानसभा भवन में अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। देवनानी ने कहा कि विधानसभा भवन की चौथी मंजिल पर एक बड़ा हॉल तैयार किया जा रहा है, जिसमें 280 विधायकों के बैठने की क्षमता होगी। यह बयान बताता है कि राज्य सरकार और विधानसभा प्रशासन भविष्य में बढ़ने वाली सदस्य संख्या को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं।

देवनानी ने कहा कि विधानसभा भवन को आधुनिक और अधिक कार्यक्षम बनाने की दिशा में कई योजनाओं पर काम चल रहा है। इसी क्रम में राजस्थान विधानसभा परिसर में संसद भवन की तर्ज पर एक सेंट्रल हॉल बनाने की योजना भी तैयार की जा रही है। सेंट्रल हॉल को लोकतांत्रिक संवाद, विशेष बैठकों, राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण समारोहों के लिए उपयोगी माना जाता है। यदि यह योजना साकार होती है तो राजस्थान विधानसभा को नई पहचान मिल सकती है।

उन्होंने आगामी 5 मई को जयपुर में होने वाले एक बड़े आयोजन की भी जानकारी दी। देवनानी ने बताया कि इस कार्यक्रम में सात राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल होंगे। इस सेमिनार में विधानसभाओं की विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली, उनकी प्रभावशीलता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी। यह आयोजन राज्यों के बीच संसदीय अनुभवों के आदान-प्रदान का मंच भी बनेगा।

देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की जीवंत संस्था है, जहां बेहतर प्रशासन, जनहित और पारदर्शिता पर लगातार काम होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि विभिन्न राज्यों के अध्यक्षों की बैठक से कार्यप्रणाली में सुधार के नए सुझाव सामने आएंगे।

उदयपुर में दिए गए अपने वक्तव्य में उन्होंने विधानसभा परिसर में विकसित नई हर्बल वाटिका और नक्षत्र वाटिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 5 मई को इन दोनों परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। यह पहल विधानसभा परिसर को पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

देवनानी ने विधानसभा में बने म्यूजियम की सफलता पर भी संतोष जताया। उन्होंने कहा कि अब तक 50 हजार से अधिक लोग इस संग्रहालय को देखने आ चुके हैं। उनके अनुसार यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास और कार्यप्रणाली के प्रति जुड़ाव बढ़ा है। विधानसभा संग्रहालय युवाओं, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर देवनानी ने स्पष्ट और संतुलित राय रखी। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती हैं। राजनीति भी इससे अलग नहीं है। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी प्रकार की दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे समाज और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों से संभव नहीं है, बल्कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से वास्तविक परिवर्तन आता है। यदि महिलाएं नीति निर्माण का हिस्सा बनेंगी तो सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर बेहतर फैसले सामने आएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देवनानी का परिसीमन पर दिया गया बयान आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। यदि विधानसभा सीटें बढ़ती हैं तो राजनीतिक दलों की रणनीति, टिकट वितरण, क्षेत्रीय समीकरण और चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। नए क्षेत्रों के निर्माण से कई नए राजनीतिक चेहरे सामने आ सकते हैं, जबकि मौजूदा क्षेत्रों की सीमाएं बदलने से पुराने समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

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