शोभना शर्मा । राजस्थान विश्वविद्यालय के मानविकी सभागार में रविवार को राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) द्वारा श्रद्धेय जयदेव पाठक जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि जयदेव पाठक का जीवन शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रहा। वे समाज के आदर्श पुरुष थे, जिन्होंने मितव्ययता से जीवन जीते हुए समाज और राष्ट्र को अधिकतम देने का प्रयास किया।
देवनानी ने भावुक होते हुए कहा कि उनका जयदेव पाठक जी के साथ लंबा सफर रहा है। शिक्षक संघ में कार्य करते हुए उन्हें पाठक जी का सानिध्य मिला और उन्हीं के संस्कारों के कारण जीवन की ऊंचाइयों तक पहुंचना संभव हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि यह बालक के चरित्र निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
जयदेव पाठक का राष्ट्र उत्थान के प्रति समर्पण
देवनानी ने कहा कि जयदेव पाठक जी स्वयं के प्रति कठोर थे, लेकिन समाज और विद्यार्थियों के लिए स्नेह व प्रेम की प्रतिमूर्ति रहे। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि शिक्षक समाज और राष्ट्र की दशा व दिशा बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि पाठक जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और विद्यार्थियों को नैतिकता, ईमानदारी और चरित्र का पाठ पढ़ाएं।
कार्यक्रम का शुभारंभ और संगठन का संकल्प
समारोह की शुरुआत मां सरस्वती और श्रद्धेय जयदेव पाठक के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुई। राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि संगठन द्वारा समाज और शिक्षा उत्थान से जुड़े कई कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 1 सितंबर 2025 को संगठन “मेरा विद्यालय मेरा स्वाभिमान” कार्यक्रम आयोजित करेगा। इस अवसर पर राजस्थान के 50 जिलों और 400 उपशाखाओं के सभी विद्यालयों में शिक्षक व विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जुड़े पांच संकल्प दिलाए जाएंगे। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय स्तर पर 5 लाख विद्यालयों में आयोजित होगा और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होने जा रहा है।
मुख्य वक्ता शिवप्रसाद का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिवप्रसाद ने जयदेव पाठक के जीवन संघर्षों और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पाठक जी ने मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। आंदोलन के दौरान उन्होंने घर छोड़ दिया, भूख-प्यास और कठिनाइयों को सहन किया, कभी रेलवे प्लेटफार्म पर भी रात गुजारनी पड़ी, लेकिन स्वतंत्रता और राष्ट्र सेवा की भावना को कभी कम नहीं होने दिया।
शिवप्रसाद ने कहा कि पाठक ने राजस्थान शिक्षक संघ को राज्य का सबसे बड़ा और प्रभावशाली संगठन बनाया। उनका जीवन राष्ट्र के लिए समर्पण और त्याग का अनुपम उदाहरण है, जिससे अनगिनत कार्यकर्ता आज भी प्रेरणा लेते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष विमल प्रसाद अग्रवाल ने गुरु और शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाठक जी ने शिक्षा, संस्कृति, विश्व शांति और समाज कल्याण के लिए तन-मन-धन सबकुछ अर्पित किया। अग्रवाल ने कहा कि हमें व्यक्ति की पूजा नहीं, बल्कि उसके गुणों की पूजा करनी चाहिए। पाठक जी जैसे महापुरुषों के गुणों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए शिक्षकों को त्याग, मितव्ययता और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करना चाहिए।
आभार और समापन
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया ने किया। अंत में जयपुर संभाग उपाध्यक्ष जयराम जाट ने सभी अतिथियों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।


