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पुरी जगन्नाथ मंदिर में देवस्नान पूर्णिमा: अनोखी परंपरा और तैयारियां

पुरी जगन्नाथ मंदिर में देवस्नान पूर्णिमा: अनोखी परंपरा और तैयारियां

शोभना शर्मा।  पुरी जगन्नाथ मंदिर में 22 जून को देवस्नान पूर्णिमा का अनोखा उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन महाप्रभु जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भक्तों के सामने स्नान करते हैं। माना जाता है कि इसी दिन महाप्रभु जगन्नाथ का जन्म हुआ था, इसलिए इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार आ जाता है, इसलिए वे अगले 15 दिनों तक किसी को दर्शन नहीं देते। इस दौरान भक्त आलारनाथ भगवान के दर्शन कर सकते हैं। रथ यात्रा से दो दिन पहले गर्भगृह भक्तों के लिए फिर से खोल दिया जाता है।

इस विशेष स्नान के लिए सोने के कुएं से पानी लाया जाएगा। शुक्रवार सुबह कुएं की निगरानी करने वाले सुना गोसाईं देवेंद्र नारायण ब्रह्मचारी की मौजूदगी में कुआं खोला जाएगा। यह कुआं 4-5 फीट चौड़ा वर्गाकार है और इसमें पांड्य राजा इंद्रद्युम्न ने सोने की ईंटें लगवाई थीं। कुएं का ढक्कन काफी भारी है और इसे 12-15 सेवक मिलकर हटाते हैं। देवस्नान पूर्णिमा के लिए कुएं से पीतल के 108 घड़ों में पानी भरा जाएगा और 13 सुगंधित वस्तुएं डालकर नारियल से ढंक दिया जाएगा। इस पानी से भगवान का स्नान कराया जाएगा।

मंदिर के पूजा विधान के वरिष्ठ सेवक डॉ. शरत कुमार मोहंती ने बताया कि सालभर भगवान को आईने के सामने स्नान कराया जाता है, लेकिन देवस्नान पूर्णिमा के लिए विशेष मंच तैयार किया जाता है। भगवानों को सूती वस्त्रों से ढंककर महाप्रभु को 35, बलभद्र जी को 33, सुभद्रा जी को 22 और सुदर्शन जी को 18 मटकी जल से नहलाया जाता है।

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार अब श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कोरोना महामारी के दौरान इनमें से तीन द्वार बंद कर दिए गए थे। 13 जून को मंगला आरती के दौरान ये द्वार फिर से खोले गए, जिसमें राज्य के नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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