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जैसलमेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में डेंटिस्ट बने ‘कुत्ता भगाओ अभियान’ के नोडल अधिकारी

जैसलमेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में डेंटिस्ट बने ‘कुत्ता भगाओ अभियान’ के नोडल अधिकारी

जैसलमेर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में इन दिनों एक अनोखा प्रशासनिक आदेश लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से अस्पताल प्रशासन ने आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकने के लिए एक विशेष व्यवस्था लागू की है। इस व्यवस्था की खास बात यह है कि इसके लिए दंत रोग विशेषज्ञ को ही ‘कुत्ता भगाओ अभियान’ का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह फैसला जहां एक ओर मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर इसकी अनोखी प्रकृति ने आमजन में उत्सुकता और सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के बाद शुरू हुई कवायद

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग, जयपुर से प्राप्त निर्देशों के बाद लिया गया है। विभाग ने सभी बड़े सरकारी अस्पतालों को डॉग फ्री जोन बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में भी आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की योजना तैयार की गई। अस्पताल परिसर में लंबे समय से आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों, तीमारदारों और यहां तक कि अस्पताल स्टाफ ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताई थी।

डेंटिस्ट डॉ. सरदारा राम को सौंपी गई जिम्मेदारी

इस अभियान के तहत दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सरदारा राम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब वे न केवल मरीजों के दांतों का इलाज करेंगे, बल्कि अस्पताल परिसर की चौकसी और आवारा कुत्तों की आवाजाही पर नियंत्रण की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉ. सरदारा राम को यह दायित्व उनकी कार्यकुशलता और प्रशासनिक सहयोग क्षमता को देखते हुए सौंपा गया है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि अस्पताल परिसर में कुत्तों का प्रवेश न हो और मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ओपीडी और वार्डों में कुत्तों से बढ़ रहा था डर

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी और कचरा पात्रों के आसपास आवारा कुत्तों की मौजूदगी से मरीजों और उनके परिजनों में भय का माहौल बन रहा था। कई बार कुत्तों के आपस में लड़ने, मरीजों के पीछे दौड़ने और रात के समय वार्डों के आसपास घूमने की घटनाएं सामने आई हैं। इन हालातों में संक्रमण फैलने, दुर्घटनाओं और मरीजों की मानसिक परेशानी की आशंका भी बनी रहती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए यह स्थिति और अधिक जोखिम भरी मानी जा रही थी।

अस्पताल को डॉग फ्री जोन बनाने के लिए उठाए जा रहे कदम

अस्पताल प्रशासन ने डॉग फ्री जोन बनाने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाने की योजना बनाई है। इसके तहत अस्पताल की बाउंड्री वॉल को ऊंचा करने, प्रवेश द्वारों पर गेट मैनेजमेंट को सख्त करने और खुले रास्तों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके अलावा नगर परिषद के सहयोग से आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से अस्पताल परिसर से बाहर निकालने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इस दौरान किसी भी पशु को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा और मानवीय तरीके से समाधान निकाला जाएगा।

शहर में चर्चा और सवालों का दौर

डेंटिस्ट को ‘कुत्ता भगाओ अभियान’ का नोडल अधिकारी बनाए जाने का यह आदेश अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अस्पताल में प्रशासनिक अधिकारी और अन्य जिम्मेदार विभाग मौजूद हैं, तो दंत रोग विशेषज्ञ को ऐसी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष के पद से नहीं, बल्कि तात्कालिक आवश्यकता और बेहतर समन्वय को ध्यान में रखकर लिया गया है। प्रशासन इसे हालात की मजबूरी और त्वरित समाधान का हिस्सा बता रहा है।

मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता

अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा, स्वच्छता और अस्पताल की गरिमा बनाए रखना है। यदि आवारा कुत्तों की समस्या पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में यह और गंभीर रूप ले सकती है। राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में लागू की गई यह अनोखी व्यवस्था भले ही चर्चा में हो, लेकिन प्रशासन का मानना है कि यदि इससे मरीजों को राहत मिलती है और अस्पताल का वातावरण सुरक्षित बनता है, तो यह कदम सही दिशा में माना जाएगा।

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