राजस्थान के अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDS University) में गुरुवार को छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर एकत्र हुए और विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारेबाजी की और कुलपति से सीधे संवाद कर अपनी मांगें रखने की कोशिश की। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से शैक्षणिक व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है, जिसके कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
कॉपियां चेक करने को लेकर उठा बड़ा सवाल
छात्र नेताओं ने बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय की उत्तर पुस्तिकाएं कॉलेज के छात्रों द्वारा जांचते हुए दिखाई दी थीं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में कॉपियां जांचने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि यह काम न तो योग्य परीक्षकों से कराया जाता है और न ही निर्धारित नियमों के अनुसार। आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक अधिकारी आपसी मिलीभगत से कॉलेज के छात्रों या अपने परिवार के सदस्यों से कॉपियां चेक करवाते हैं। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार का मामला भी बनता है।
कुलपति से मिलने की मांग, गेट पर दिया धरना
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुलपति को बाहर बुलाकर ज्ञापन देने की मांग की। छात्र नेताओं का कहना था कि जब तक कुलपति खुद सामने आकर उनकी बात नहीं सुनेंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी मांग को लेकर छात्र यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। काफी समय तक इंतजार करने के बावजूद जब कुलपति ज्ञापन लेने बाहर नहीं आए, तो छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद छात्र नेताओं के नेतृत्व में स्टूडेंट्स नारेबाजी करते हुए जयपुर रोड की ओर बढ़ गए और हाईवे की तरफ कूच कर दिया।
हाईवे की ओर कूच, पुलिस रही तैनात
छात्रों के हाईवे की ओर बढ़ने की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस मौके पर पहुंची। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए यूनिवर्सिटी गेट और आसपास के इलाकों में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। हालांकि, स्थिति को संभाल लिया गया और कोई बड़ा टकराव नहीं हुआ। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद छात्र अपने आरोपों और मांगों पर अड़े रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
छात्र नेताओं के गंभीर आरोप
छात्र नेता जुबेर खान ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एमडीएस यूनिवर्सिटी लगातार अपनी प्रतिष्ठा खोती जा रही है। इसके लिए उन्होंने कुलगुरु, परीक्षण नियंत्रक और अन्य प्रशासनिक स्टाफ को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि इन अधिकारियों की आपसी मिलीभगत के कारण हर साल लाखों छात्र मानसिक और शैक्षणिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति भी कुलगुरु द्वारा की जाती है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
परीक्षा प्रणाली और खेलों में भ्रष्टाचार का आरोप
छात्र नेताओं ने मांग की कि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच से लेकर परिणाम घोषित करने तक हर स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2025-26 के सत्र में विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में भी भारी भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि खेलों में चयन प्रक्रिया और आयोजन के दौरान भी पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे योग्य खिलाड़ियों के साथ अन्याय हुआ।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने स्पष्ट मांग की कि परीक्षा प्रणाली और खेलों में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया
छात्रों के प्रदर्शन के बीच एमडीएस यूनिवर्सिटी प्रशासन ने गेट के बाहर एक नोटिस चस्पा किया। नोटिस में लिखा गया कि विश्वविद्यालय परिसर में बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध है। प्रशासन ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी तरह का प्रदर्शन किया गया और उससे विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा, तो इसे राजकार्य में बाधा माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ता टकराव
विश्वविद्यालय प्रशासन के नोटिस के बाद छात्रों में और रोष देखने को मिला। छात्रों का कहना है कि प्रशासन समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रबंधन का तर्क है कि परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है।
भविष्य में आंदोलन तेज होने के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम ने एमडीएस यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह मामला न केवल एमडीएस यूनिवर्सिटी, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है।


