मनीषा शर्मा, अजमेर। दरगाह में आगामी उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चढ़ाई जाने वाली चादर पर रोक लगाने की मांग को लेकर अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने यह गुहार लगाते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। मामले पर बुधवार को लिंक कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां वादी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
वादी की याचिका: संवैधानिक पदों से चादर पेश करने पर रोक की मांग
वादी विष्णु गुप्ता ने दलील दी कि उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक व्यक्तियों के नाम से चादर पेश की जाती है। यह परंपरा हर वर्ष अल्पसंख्यक मंत्रालय के माध्यम से पूरी की जाती है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया विवादित है क्योंकि उनके द्वारा पहले से दायर मामलों में दरगाह परिसर में संकट मोचन शिव मंदिर होने का मुद्दा न्यायालय के समक्ष लंबित है। उन्होंने मांग की कि जब तक संबंधित विवादों पर अदालत अंतिम निर्णय नहीं देती, तब तक संवैधानिक पदों की ओर से चादर चढ़ाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
लिंक कोर्ट में सुनवाई, वादी पक्ष की दलीलें पूरी
अजमेर के न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-दो की अदालत में बुधवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन न्यायाधीश अवकाश पर होने के कारण मामले को लिंक कोर्ट में सूचीबद्ध किया गया। वादी पक्ष की ओर से हाईकोर्ट के एडवोकेट संदीप कुमार उपस्थित रहे, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष विस्तृत दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। सिविल लाइंस थाना पुलिस का जाब्ता कोर्ट परिसर में तैनात किया गया था।
फोटो और वीडियो पोस्ट करने पर भी आपत्ति दर्ज
वादी के अधिवक्ता संदीप कुमार ने अदालत को बताया कि उर्स के दौरान जब भी प्रधानमंत्री या अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चादर पेश की जाती है, उसका फोटो और वीडियो अल्पसंख्यक मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से पोस्ट किया जाता है। अधिवक्ता के अनुसार, यह कार्रवाई वादी के विधिक अधिकारों का हनन करती है क्योंकि संबंधित विवाद न्यायालय में पहले से लंबित है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सार्वजनिक प्रकाशन से गलत संदेश जाता है और लंबित वाद के परिणामों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत से तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
प्रतिवादी पक्ष कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ
मामले में प्रतिवादियों को 8 दिसंबर को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन सुनवाई के समय किसी भी प्रतिवादी अधिवक्ता की उपस्थिति नहीं रही। इस पर अदालत ने वादी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। अदालत यह भी देखेगी कि क्या उर्स के मौके पर संवैधानिक पदों की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है या नहीं।
पहले से लंबित विवादों के संदर्भ में उठी मांग
यह मामला केवल चादर चढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे पहले विष्णु गुप्ता ने अजमेर दरगाह परिसर में संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा करते हुए वाद पेश किया था। यह विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। वादी पक्ष का कहना है कि जब तक धार्मिक स्थान और परंपराओं से जुड़े विवाद कानूनी रूप से स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक संवैधानिक पदों के प्रतिनिधित्व का उपयोग धार्मिक रस्मों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट का निर्णय जल्द आने की संभावना
अदालत ने दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अदालत उर्स के दौरान वीआईपी चादर चढ़ाने के मामले में अंतरिम रोक लगाने का आदेश देती है या पारंपरिक प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहने देती है। वादी पक्ष का कहना है कि उनका उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को कानून के तहत सुलझाना है और किसी भी संवैधानिक पद का अनावश्यक उपयोग रोकना है। अदालत का आगामी आदेश इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।


