राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर स्थानीय स्वशासन को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने राज्य में पंचायत-निकाय चुनाव जल्द कराने की मांग उठाते हुए भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। सोमवार को टोंक सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान पायलट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में लंबे समय से प्रशासकों के भरोसे स्थानीय निकाय चल रहे हैं, जिससे आम जनता के दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ रही है।
पायलट ने कहा कि शहरों और गांवों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है, तभी उनके मुद्दों का समाधान प्रभावी ढंग से हो पाता है। वर्तमान स्थिति में छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से राज्य में यह सरकार बनी है, तब से विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव, नगर निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव नहीं कराए गए हैं। पायलट के अनुसार, यह स्थिति संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहे हैं, जबकि न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा भी बीत चुकी है।
पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है क्योंकि उसे परिणाम अपने पक्ष में आने का भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव होते हैं तो जनता सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करेगी और यह भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसी कारण बार-बार अलग-अलग कारणों का हवाला देकर चुनावों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस दौरान उन्होंने मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा के तहत काम लगभग बंद हो चुका है, जिससे गरीब और मजदूर वर्ग को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पायलट ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा का नाम बदलने के पीछे असली उद्देश्य इसे कमजोर करना था, जो अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब लाखों लोग इस योजना के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे थे, लेकिन अब यह व्यवस्था लगभग ठप हो गई है।
पायलट ने यह भी कहा कि सरकार केवल प्रचार और विज्ञापनों के माध्यम से अपनी उपलब्धियां दिखाने का प्रयास कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में की गई घोषणाओं का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चार लाख नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कितने लोगों को रोजगार मिला, इसका स्पष्ट जवाब सरकार के पास नहीं है।
गर्मी के मौसम को देखते हुए पायलट ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सरकार को सचेत किया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है, इसलिए सरकार को अभी से तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जल आपूर्ति, टैंकर व्यवस्था, पाइपलाइन की मरम्मत और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
पायलट ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द चुनाव नहीं कराती है तो पार्टी न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के साथ-साथ जनदबाव भी बनाएगी। उनका कहना था कि लोकतंत्र में चुनाव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की आवाज को मजबूत करने का माध्यम हैं और इसे टालना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है।
राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। स्थानीय निकाय चुनावों की मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यदि चुनाव होते हैं तो इससे न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद की जा सकती है।


