मनीषा शर्मा, अजमेर । स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए सेवन वंडर्स पार्क को हटाने की प्रक्रिया लंबे समय से टल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने करीब छह महीने पहले ही आदेश जारी कर दिए थे कि पार्क को हटाया जाए, लेकिन तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और प्रशासन की सुस्ती
सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बने इस पार्क को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट का कहना था कि जल निकायों और आर्द्र भूमि पर अतिक्रमण करके कोई भी शहर स्मार्ट नहीं बन सकता। अदालत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे। इसके बावजूद, आदेश दिए जाने के छह महीने बाद भी केवल एक प्रतिमा को हटाकर जमीन पर रखा गया है, जबकि बाकी ढांचा जस का तस खड़ा है। अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने पार्क को हटाने के लिए टेंडर निकाले, लेकिन उसमें केवल एक कंपनी ने बिड किया। इस कारण टेंडर निरस्त करना पड़ा। फिलहाल नया टेंडर प्रक्रिया में है, लेकिन काम अभी शुरू नहीं हुआ है।
याचिकाकर्ता ने दी चेतावनी
याचिकाकर्ता अशोक मलिक ने साफ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 17 सितंबर तक सेवन वंडर्स को तोड़ना होगा। यदि प्रशासन तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं करता, तो वे 18 सितंबर को ही सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दाखिल करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई
इस मामले की पिछली सुनवाई 26 अगस्त को होनी थी, लेकिन केस लिस्ट नहीं होने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई। अगली सुनवाई की तारीख भी अभी तय नहीं हुई है।
करोड़ों की लागत से बना था सेवन वंडर्स पार्क
अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत 11.64 करोड़ रुपए की लागत से इस पार्क का निर्माण किया गया था। पार्क में दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां बनाई गई थीं, जिनमें शामिल हैं –
ताजमहल (भारत)
एफिल टावर (पेरिस)
पिरामिड्स (मिस्र)
पीसा की झुकी हुई मीनार (इटली)
रोम का कोलोजियम
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क)
क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा (रियो डी जेनेरियो)
इन सभी संरचनाओं को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन बाद में यह मामला विवादों में घिर गया।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था – “आपकी कार्यप्रणाली से ऐसा नहीं लगता कि आप अजमेर को स्मार्ट बनाना चाहते हैं। हमें आश्चर्य है कि शहर में जल निकायों और आर्द्र भूमि की सुरक्षा किए बिना कोई शहर कैसे स्मार्ट बन सकता है। जल निकायों पर अतिक्रमण करके शहर को स्मार्ट नहीं कहा जा सकता।” 25 फरवरी को हुई सुनवाई में स्मार्ट सिटी की एसीईओ और नगर निगम कमिश्नर की ओर से एक एफिडेविट पेश किया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर सवाल
अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कई योजनाएं अधूरी रह गईं और कुछ योजनाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़े हो गए। सेवन वंडर्स पार्क भी उसी विवाद का हिस्सा बन चुका है। जहां प्रशासन ने इसे पर्यटन की दृष्टि से अहम बताया था, वहीं पर्यावरणविदों और याचिकाकर्ताओं ने इसे जल निकायों और आर्द्र भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया निर्माण बताया। सुप्रीम कोर्ट में भी यही तर्क रखा गया कि पर्यावरण की अनदेखी करके बनाए गए ढांचे को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
अब 17 सितंबर की डेडलाइन खत्म होने के बाद प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया था कि वह समय सीमा के भीतर पार्क को हटा देगा। लेकिन अभी तक केवल टेंडर प्रक्रिया चल रही है और असल तोड़फोड़ का काम शुरू नहीं हुआ। यदि याचिकाकर्ता द्वारा अवमानना याचिका दाखिल की जाती है, तो प्रशासन को बड़ी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।