शोभना शर्मा। उत्तर पश्चिम रेलवे के दौसा रेलवे स्टेशन ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा ‘शून्य प्लस’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड उत्तर पश्चिम रेलवे और राजस्थान के किसी भी रेलवे स्टेशन को पहली बार प्राप्त हुआ है। दौसा स्टेशन को यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।
सोलर पावर प्लांट और बिजली की बचत
दौसा स्टेशन पर पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उत्पादन के लिए 100 किलोवाट पीक क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट के माध्यम से सालाना 1.32 किलोवाट घंटा बिजली का उत्पादन होता है। यह उत्पादन स्टेशन की सालाना खपत 1.28 किलोवाट घंटा से अधिक है, जिससे स्टेशन न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि सालाना लगभग 13.20 लाख रुपये की बचत भी कर रहा है।
ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग
रेलवे स्टेशन पर ऊर्जा दक्ष उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे बिजली की खपत में भारी कमी आई है। इसमें निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:
एलईडी लाइट्स का उपयोग: सम्पूर्ण स्टेशन परिसर और सर्विस बिल्डिंग क्षेत्रों में पारंपरिक बल्बों के स्थान पर ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइट्स का उपयोग किया गया है।
लाइट सेंसर का उपयोग: लाइटों को सेंसर से जोड़कर आवश्यकता अनुसार लाइट का उपभोग किया जा रहा है।
एचवीएलएस पंखे: उच्च क्षमता के एचवीएलएस पंखे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए हैं, जो बिजली की खपत में कमी लाते हैं।
टाइमर स्विच और वेब आधारित सिस्टम: पानी आपूर्ति के पंपों को वेब आधारित सिस्टम से संचालित किया जा रहा है और प्लेटफॉर्म लाइटों को कंट्रोल करने के लिए टाइमर स्विच लगाए गए हैं।
सोलर गीजर: सोलर गीजर के उपयोग से बिजली की खपत में कमी आई है।
रेलवे का पर्यावरण संरक्षण के प्रति योगदान
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण ने बताया कि रेलवे जीएम अमिताभ के दिशा-निर्देशों में यह कार्य किया गया है। रेलवे का उद्देश्य है कि अधिकाधिक पर्यावरण अनुकूल स्त्रोतों का उपयोग कर प्रदूषण रहित परिवहन प्रणाली बनाई जाए। दौसा स्टेशन को मिला ‘शून्य प्लस’ अवॉर्ड 3 वर्षों के लिए मान्य है। यह पुरस्कार न केवल रेलवे के प्रयासों की सराहना है, बल्कि अन्य रेलवे स्टेशनों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है। राजस्थान में ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में यह एक अनूठी पहल है, जो भविष्य में और भी बेहतर परिणाम दे सकती है।


