एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक नया और बेहद चालाक साइबर खतरा सामने आया है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने AI आधारित एक नए AI Malware को लेकर चेतावनी जारी की है, जो दिखने में आम वायरस जैसा नहीं है, लेकिन लंबे समय में फोन की परफॉर्मेंस को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। इस मैलवेयर को इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से काम करता है और बिना किसी चेतावनी या पॉप-अप के चुपचाप फोन के अंदर एक्टिव रहता है। यूजर को लगता है कि फोन सामान्य रूप से चल रहा है, लेकिन असल में बैकग्राउंड में सिस्टम पर लगातार दबाव बढ़ता रहता है।
बिना भनक लगाए करता है काम AI Malware
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह AI मैलवेयर पारंपरिक तरीके से न तो सीधे आपकी निजी जानकारी चुराता है और न ही कैमरा या माइक्रोफोन के जरिए जासूसी करता है। यही वजह है कि इसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद यह मैलवेयर बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाता है और AI की मदद से ऐप्स और वेबसाइट्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को पहचानता है। इसके बाद यह अपने आप उन विज्ञापनों पर क्लिक करता रहता है। इस पूरी प्रक्रिया में यूजर को किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आती। स्क्रीन पर कोई असामान्य पॉप-अप नहीं आता और न ही फोन अचानक हैंग होता है। लेकिन अंदर ही अंदर फोन के रिसोर्सेज का लगातार इस्तेमाल होता रहता है।
फोन स्लो होने की असली वजह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बैकग्राउंड में होने वाली ये AI आधारित गतिविधियां फोन के प्रोसेसर और RAM पर अतिरिक्त लोड डालती हैं। इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगता है। फोन पहले से ज्यादा स्लो रिस्पॉन्स देने लगता है, ऐप्स खुलने में समय लेने लगते हैं और मल्टीटास्किंग के दौरान फोन अटकने लगता है। इसके साथ-साथ बैटरी तेजी से खत्म होना, फोन का असामान्य रूप से गर्म होना और कुछ मामलों में मोबाइल डेटा की खपत अचानक बढ़ जाना भी इस मैलवेयर के संकेत हो सकते हैं। कई यूजर्स इसे फोन की उम्र या स्टोरेज की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
Dr. Web की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
इस खतरनाक AI मैलवेयर का खुलासा साइबर सिक्योरिटी कंपनी Dr. Web की रिसर्च रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह मैलवेयर खुद को इस तरह छुपा लेता है कि वह किसी सामान्य ऐप प्रोसेस का हिस्सा लगता है। क्योंकि न तो यह कोई चेतावनी देता है और न ही संदिग्ध परमिशन मांगता है, इसलिए यूजर्स को लंबे समय तक यह एहसास ही नहीं होता कि उनका फोन संक्रमित हो चुका है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा खतरा है।
APK फाइल्स से तेजी से फैल रहा खतरा
Dr. Web की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह मैलवेयर संक्रमित एंड्रॉयड ऐप्स के जरिए फैल रहा है। इनमें से कुछ ऐप्स Xiaomi के GetApps स्टोर और अन्य थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स पर भी देखे गए हैं। विशेष रूप से वे यूजर्स ज्यादा जोखिम में हैं जो अनजान वेबसाइट्स से APK फाइल डाउनलोड करके मैन्युअली ऐप इंस्टॉल करते हैं। ऐसे ऐप्स दिखने में बिल्कुल सामान्य होते हैं, लेकिन एक बार इंस्टॉल होने के बाद मैलवेयर बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाता है और लगातार फोन की परफॉर्मेंस को नुकसान पहुंचाता रहता है।
AI मैलवेयर का बढ़ता ट्रेंड क्यों चिंताजनक
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि मैलवेयर में AI का इस्तेमाल भविष्य के लिए एक बेहद चिंताजनक संकेत है। AI आधारित मैलवेयर यूजर के व्यवहार, स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट और इस्तेमाल किए जा रहे ऐप्स के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। इसका मतलब यह है कि ऐसे मैलवेयर को पहचानना और ब्लॉक करना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। पारंपरिक एंटीवायरस या सिक्योरिटी सिस्टम भी कई बार इन्हें सामान्य गतिविधि समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
बचाव ही सबसे कारगर उपाय
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। यूजर्स को सलाह दी गई है कि: केवल Google Play Store जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही ऐप डाउनलोड करें। फोन को हमेशा लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच और सिस्टम अपडेट्स के साथ अपडेट रखें। अनजान वेबसाइट्स, संदिग्ध लिंक और थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर्स से दूरी बनाए रखें। समय-समय पर मोबाइल में सिक्योरिटी या एंटीवायरस स्कैन जरूर करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फोन अचानक स्लो होने लगे, बैटरी जल्दी खत्म हो या डेटा खपत असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच करें।


