तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को 68वें सालाना ग्रैमी अवार्ड्स में प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। यह पहली बार है जब किसी आध्यात्मिक नेता को संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है। 90 वर्ष की उम्र में दलाई लामा को यह सम्मान उनके ज्ञान, संदेश और वैश्विक मानवता से जुड़े विचारों को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए दिया गया।
किस एलबम के लिए मिला सम्मान
लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें ग्रैमी अवॉर्ड समारोह में दलाई लामा के विशेष एल्बम ‘मेडिटेशन: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ को बेस्ट ऑडियो बुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग कैटेगरी में सम्मानित किया गया।
एल्बम 1 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था और इसमें दलाई लामा के विचारों, शिक्षाओं और आध्यात्मिक संदेशों को संगीत के साथ पिरोया गया है।
इस प्रोजेक्ट में दलाई लामा के साथ सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान तथा उनके पुत्र अमान अली बंगश और अयान अली बंगश ने भी सहयोग किया। यह सहयोग भारतीय शास्त्रीय संगीत और तिब्बती दर्शन के अनोखे संगम का उदाहरण माना जा रहा है।
पुरस्कार पर दलाई लामा की प्रतिक्रिया
पुरस्कार मिलने के बाद दलाई लामा ने कहा कि वे इस अवॉर्ड को व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि वैश्विक मानवता की साझी जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और मानते हैं कि संगीत और आध्यात्मिकता दुनिया को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
दलाई लामा का आध्यात्मिक और शैक्षणिक सफर
दलाई लामा ने छह वर्ष की उम्र में पारंपरिक बौद्ध शिक्षा की शुरुआत की थी। 25 वर्ष की आयु में उन्हें बौद्ध धर्म की सर्वोच्च उपाधि ‘गेशे ल्हारम्पा’ से सम्मानित किया गया, जो बौद्ध दर्शन में डॉक्टरेट के बराबर मानी जाती है।
1959 के बाद से वे भारत में रहते हैं और भारत को अपना दूसरा घर बताते हैं। उनके नेतृत्व और शिक्षाओं ने पूरी दुनिया में शांति, करुणा और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा दिया है।
संगीत जगत में ऐतिहासिक क्षण
ग्रैमी अवॉर्ड दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संगीत पुरस्कारों में गिना जाता है। दलाई लामा को यह अवॉर्ड मिलना न केवल संगीत जगत बल्कि आध्यात्मिक दुनिया के लिए भी ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। इससे यह भी संदेश जाता है कि संगीत सीमाओं, धर्मों और संस्कृतियों के पार जाकर मानवता को एक सूत्र में जोड़ सकता है।


