बाड़मेर जिले के कवास क्षेत्र में स्थित ऐश्वर्या वेलपेड-8 के पास किसान के खेत से हो रहा क्रूड ऑयल का अनियंत्रित रिसाव शुक्रवार को पांचवें दिन बंद हो गया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जमीन के भीतर से तेल निकलने का वास्तविक कारण क्या था। कंपनी ने एहतियातन संबंधित सभी तेल कुओं को अस्थायी रूप से बंद कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिसाव की घटना 23 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे सामने आई थी, जब किसान हरजीराम खोथ के खेत से अचानक कच्चा तेल फूटने लगा। इसके बाद कंपनी की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और नियंत्रण के प्रयास शुरू किए गए।
Cairn Vedanta ने लिया शटडाउन
कंपनी के ऐश्वर्या वेलपेड-8 पर 20 से अधिक तेल कुएं संचालित हैं। रिसाव की सूचना मिलते ही पूरे वेलपेड पर शटडाउन लिया गया। इससे कंपनी के उत्पादन पर लगभग 5 हजार बैरल प्रतिदिन का असर पड़ा है। एक बैरल में करीब 160 लीटर तेल होता है।
कंपनी के मीडिया मैनेजर मुकेश मथराणी ने बताया कि शटडाउन के बाद रिसाव पूरी तरह रुक गया है। अब एक-एक कर सभी पाइपलाइन सेक्शन और कुओं की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लीकेज किस स्रोत से हुआ। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्र को टीनशेड लगाकर ढक दिया गया है और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। दो सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
भूकंप या ब्लास्ट, क्या है वजह
ग्रामीणों ने 24 फरवरी की रात ब्लास्टिंग का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि इलाके में धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी, जिसके बाद जमीन से तेल निकलने की घटना हुई। कंपनी अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसी रात 11 बजकर 25 मिनट पर 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह जानकारी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
कंपनी के अनुसार भूकंप का केंद्र तेल क्षेत्र से दूर और जमीन की सतह से लगभग 5 किलोमीटर गहराई पर था, जबकि इस इलाके में ड्रिलिंग की औसत गहराई करीब 2 किलोमीटर है। ऐसे में भूकंप और ड्रिलिंग गतिविधियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करना अभी संभव नहीं बताया गया है।
किसान की पीड़ा और नुकसान
किसान हरजीराम खोथ ने बताया कि घटना के दिन उन्हें कंपनी के सुरक्षा गार्ड ने सूचना दी कि उनके खेत से तेल निकल रहा है। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि करीब 2 से 3 बीघा जमीन में काला तेल फैल चुका था।
उनके अनुसार तेल का दबाव काफी अधिक था। कंपनी के इंजीनियरों ने जेसीबी मशीन से खेत में गड्ढा खोदकर तेल को नियंत्रित करने का प्रयास किया। लगभग 100 मीटर लंबी खाई बनाकर तेल को एक गड्ढे में इकट्ठा किया गया, जहां से वैक्यूम टैंकरों के माध्यम से उसे हटाया गया। पांच दिनों में 60 से अधिक टैंकर तेल दूसरी जगह ले जाया गया।
हरजीराम का कहना है कि उनकी कुल 6 बीघा जमीन है, जिसमें से 4 बीघा में तेल फैल गया है। हालांकि कंपनी ने खेत में फैले तेल पर मिट्टी और रेत डाली है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी तेल रिसता दिखाई दे रहा है और जमीन धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। किसान ने आशंका जताई कि अब वह लंबे समय तक खेती नहीं कर पाएंगे।
पर्यावरण और कृषि पर असर
तेल रिसाव से कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा तेल मिट्टी की संरचना और सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे लंबे समय तक खेती प्रभावित हो सकती है। हालांकि कंपनी ने दावा किया है कि प्रभावित क्षेत्र की वैज्ञानिक जांच और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण और पर्यावरणीय असर की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
जांच जारी, जवाब की प्रतीक्षा
घटना के पांच दिन बाद रिसाव रुकना राहत की बात है, लेकिन कारणों का पता लगना अभी बाकी है। कंपनी सभी कुओं और पाइपलाइनों की विस्तृत जांच कर रही है। स्थानीय ग्रामीण और किसान प्रशासन से पारदर्शी जांच और नुकसान के आकलन की मांग कर रहे हैं। बाड़मेर का यह मामला तेल उत्पादन और स्थानीय कृषि हितों के बीच संतुलन की चुनौती को फिर उजागर करता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संभावित मुआवजे को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


