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अजमेर शरीफ उर्स : दरगाह में भीड़ उमड़ी, CM की चादर पेश — शनिवार को होगा समापन

अजमेर शरीफ उर्स : दरगाह में भीड़ उमड़ी, CM की चादर पेश — शनिवार को होगा समापन

मनीषा शर्मा, अजमेर। अजमेर शरीफ दरगाह में हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें उर्स की रौनक चरम पर है। दरगाह क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सूफियाना कलाम की गूंज, चिरागों की रोशनी और जायरीन की आवाजाही इस पवित्र समारोह को और खास बना रही है। शहर में चारों ओर चिश्तिया रंग नजर आ रहा है और श्रद्धालु बड़ी तादाद में मजार शरीफ पर पहुंचकर अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं। उर्स के दौरान आज जुमे की नमाज विशेष एहतियात के साथ अदा की गई। लाखों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। नमाज के बाद बाहर निकलते समय कुछ जायरीन भीड़ के बीच गिर पड़े, हालांकि पुलिस और स्वयंसेवकों ने समय रहते उन्हें सुरक्षित निकाल लिया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ এবং स्थिति जल्द ही सामान्य बना दी गई।

मजार पर चादर और फूलों की पेशकश

जायरीन की ओर से मखमली चादरें, गुलाब के फूल और अकीदत का नजराना लगातार पेश किया जा रहा है। दरगाह परिसर, महफिलखाना और आसपास की गलियां श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरी तरह भरी हुई हैं। कायड़ विश्राम स्थली पर भी दूसरे राज्यों से पहुंचे जायरीन का तांता लगा हुआ है। यहां उनके ठहरने, भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं के इंतजाम किए गए हैं। कई स्वयंसेवी संगठन और प्रशासनिक एजेंसियां मिलकर सेवा कार्यों में जुटी हुई हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री की ओर से पेश हुई चादर

शाम के समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से दरगाह में चादर पेश की गई। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष हमीद खान मेवाती के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने यह चादर आस्ताने पर चढ़ाई। बुलन्द दरवाजे से मुख्यमंत्री का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने कहा कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने गरीब, कमजोर और बेसहारा लोगों की सेवा तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने सभी जायरीन और प्रदेशवासियों को उर्स की मुबारकबाद देते हुए अमन और खुशहाली की दुआ की कामना की।

कुल की रस्म के साथ होगा समापन

उर्स के कार्यक्रम अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। शनिवार को कुल की रस्म अदा की जाएगी और जन्नती दरवाजा बंद कर दिया जाएगा। रजब की 6 तारीख को अहाता-ए-नूर में छठी की फातिहा होगी। खुद्दाम-ए-ख्वाजा यह रस्म अदा कराएंगे। सुबह 11 बजे महफिलखाना में कुल की महफिल शुरू होगी, जबकि दोपहर 1:15 बजे दरगाह दीवान के पुत्र सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती जन्नती दरवाजे से होकर आस्ताना शरीफ तक पहुंचेंगे। जैसे ही रस्म पूरी होगी, दरवाजा औपचारिक रूप से बंद कर दिया जाएगा, जो उर्स के समापन का संकेत होगा।

जुमे की नमाज में उमड़ी आस्था

सालाना उर्स के दौरान होने वाली पहली बड़ी जुम्मे की नमाज में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। शहर काजी मौलाना तौसीफ अहमद सिद्दीकी की इमामत में दो रकअत फर्ज नमाज अदा की गई। कायड़ विश्राम स्थली पर भी जुमे की नमाज का विशेष इंतजाम किया गया। रजब की 5 तारीख होने के कारण आस्था और श्रद्धा का उत्साह और बढ़ गया। पूरा परिसर नमाज, दुआ और इबादत से भरा दिखाई दिया।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कड़ी निगरानी

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और दरगाह कमेटी लगातार समन्वय में काम कर रहे हैं। प्रवेश एवं निकास मार्गों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी, एंबुलेंस और क्विक-रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है, ताकि किसी भी तरह की अफरा-तफरी की स्थिति पैदा न हो। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे विशेष सहायता डेस्क के माध्यम से रास्ता पा रहे हैं।

चादर पेश करने वालों का तांता

उर्स के दौरान चादर लेकर आने वाले जायरीनों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। ढोल-ढमाकों और नारे-तकबीर के साथ श्रद्धालु दरगाह की ओर बढ़ते हैं और अपने परिवार तथा समाज की खुशहाली की दुआ मांगते हैं। इसी क्रम में भाजपा नेता और संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला भी दरगाह पहुंचे और उन्होंने आस्ताना शरीफ पर चादर पेश की। यह सिलसिला पूरे उर्स के दौरान लगातार जारी रहने वाला है।

कायड़ विश्राम स्थली में उमड़ी भीड़

उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों — उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और कई अन्य इलाकों से जायरीन कायड़ विश्राम स्थली पहुंच रहे हैं। यहां बड़े डोम, छोटे टेंट, उचित मूल्य की दुकानें, दूध वितरण, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की गई है। नगर निगम, फायर ब्रिगेड, एडीए और जिला प्रशासन के शिविर लगातार सक्रिय हैं।

जन्नती दरवाजे पर जुट रही लंबी कतार

दरगाह के बाहर जन्नती दरवाजे से गुजरने की होड़ बनी हुई है, क्योंकि माना जाता है कि इस दरवाजे से गुजरने वालों पर खास रहमत होती है। श्रद्धालुओं को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही। हर तरफ दुआ, मोहब्बत और भाईचारे का माहौल उर्स की खास पहचान को फिर से जीता हुआ महसूस कराया रहा है।

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