latest-news

अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट: लेबनान हिंसा के बीच ईरान का सख्त रुख

अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट: लेबनान हिंसा के बीच ईरान का सख्त रुख

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित सीजफायर वार्ता एक बार फिर अनिश्चितता के घेरे में आ गई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए अपने प्रतिनिधिमंडल को अब तक रवाना नहीं किया है। यह स्थिति उस समय पैदा हुई है जब मध्य पूर्व में विशेषकर लेबनान में इजराइल के हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई नहीं रुकती, तब तक वह किसी भी तरह की वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार नहीं होगा। ईरानी मीडिया ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उसका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है। इसके उलट, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया कि शांति वार्ता के लिए सबसे पहली शर्त सभी मोर्चों पर सीजफायर का पालन होना है, खासकर लेबनान में।

गौरतलब है कि 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। इसी समझौते के तहत इस्लामाबाद में यह बैठक प्रस्तावित की गई थी, जिसमें दोनों देश कई अहम मुद्दों पर चर्चा करने वाले थे। हालांकि, मौजूदा हालात ने इस प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या तय समय पर यह वार्ता हो पाती है या नहीं।

अमेरिका और ईरान के बीच जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होनी थी, उनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण है। अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का उच्च स्तर का यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और अपने मौजूदा भंडार को देश से बाहर करना होगा। साथ ही, परमाणु सुविधाओं को सीमित या बंद करने की भी मांग की जा रही है। दूसरी ओर, ईरान इन शर्तों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है और इस पर किसी भी तरह की सख्ती को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।

इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच विवाद का एक बड़ा कारण बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस का परिवहन होता है। ईरान इस क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और यहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहे, जहां किसी प्रकार का शुल्क या बाधा न हो।

बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी वार्ता का एक अहम विषय है। अमेरिका लंबे समय से ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं पर रोक लगाने की मांग करता रहा है। इसके विपरीत, ईरान इसे अपनी सुरक्षा का आवश्यक हिस्सा मानता है और इसमें किसी भी तरह की कटौती के लिए तैयार नहीं है।

प्रतिबंधों का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल है। ईरान चाहता है कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं। इसके साथ ही, वह अपने फ्रीज किए गए संपत्तियों की वापसी और आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहा है।

इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वह इस संभावित वार्ता में भाग लेने वाले थे। रवाना होने से पहले उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि ईरान ईमानदारी के साथ बातचीत करता है, तो अमेरिका भी सकारात्मक रुख अपनाएगा, लेकिन अगर ईरान किसी तरह की चालबाजी करता है, तो अमेरिका सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।

वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस वार्ता के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और रेड लाइन तय कर दी हैं, जिनके आधार पर ही आगे की बातचीत होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि दोनों पक्ष गंभीरता से बातचीत करें, तो इसका सकारात्मक परिणाम निकल सकता है।

हालांकि, लेबनान में बिगड़ते हालात ने इस पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। इजराइल द्वारा किए जा रहे हमलों के कारण वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और कई क्षेत्रों में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी हो गई है। हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह इजराइल के खिलाफ सख्त रुख अपनाए और किसी भी तरह की रियायत न दे।

इजराइल का दावा है कि उसने हाल ही में हिजबुल्लाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सैकड़ों रॉकेट लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं और कई लड़ाकों को मार गिराया है। वहीं, हिजबुल्लाह ने भी इजराइल के कई शहरों पर रॉकेट हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। ब्रिटेन और कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने क्षेत्र में जारी हिंसा पर चिंता जताई है। भारत ने भी लेबनान में आम नागरिकों की मौतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है।

इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हो गई है, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता का विषय है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता अब कई चुनौतियों से घिर चुकी है। एक ओर जहां दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संघर्षों ने इस स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।

अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईरान अपने रुख में बदलाव करता है और इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक में शामिल होता है या फिर लेबनान में जारी हिंसा के कारण यह वार्ता टल जाती है। यदि यह बैठक स्थगित होती है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों पर असर पड़ेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता की संभावनाएं भी कमजोर हो सकती हैं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading