मनीषा शर्मा। राजस्थान के पाली जिले में संचालित करीब 600 उद्योगों पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस स्थिति को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह संकट सरकार की किसी नीति या निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि सीईटीपी फाउंडेशन और ट्रीटमेंट प्लांट-6 का संचालन करने वाली स्वराष्ट्र कंपनी के बीच चल रहे आपसी विवाद का नतीजा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
सीईटीपी और स्वराष्ट्र कंपनी के विवाद से बिगड़ी स्थिति
मंत्री खर्रा ने बताया कि दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते के तहत उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार किया जाना था। इसी व्यवस्था के आधार पर पाली के सैकड़ों उद्योग वर्षों से संचालित हो रहे थे। हालांकि हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराने लगे, जिसका सीधा असर सीईटीपी के संचालन पर पड़ा। विवाद के चलते सीईटीपी फाउंडेशन के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए, जिससे हालात और अधिक जटिल हो गए। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों के सामने उत्पादन बंद करने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
न्यायालय में मामला, सरकार की सीमित भूमिका
झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि यह पूरा प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में सरकार किसी भी प्रकार का सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी तथ्यों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते फिलहाल निर्णय न्यायालय के दायरे में है। मंत्री के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि उद्योगों को फिलहाल कानूनी समाधान का इंतजार करना होगा।
प्रदूषण को लेकर सख्त रुख
मंत्री खर्रा ने प्रदूषण के मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि सीईटीपी बंद रहने के दौरान नदी या सीवरेज सिस्टम में दूषित पानी छोड़े जाने की कोई शिकायत सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि चोरी-छिपे टैंकरों के माध्यम से गंदे पानी का निस्तारण करने के मामलों को भी गंभीरता से लिया जाएगा। पर्यावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
जलभराव की समस्या पर हाईवे निर्माण को ठहराया जिम्मेदार
पाली शहर में लगातार बढ़ रही जलभराव की समस्या पर भी मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शहर के चारों ओर हाईवे निर्माण कंपनियों द्वारा ऊंचाई पर सड़कें बना दी गई हैं, जिससे बरसाती पानी की प्राकृतिक निकासी बाधित हो गई है। इसी कारण बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। मंत्री ने बताया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। इसमें बड़े नाले के निर्माण की योजना शामिल है, जिससे भविष्य में शहर को राहत मिल सके।
सड़कों की खराब गुणवत्ता पर नाराजगी
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पाली में सड़कों की खराब हालत को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंताओं से मौके पर ही जानकारी ली और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने तथा गुणवत्ता सुधार के निर्देश दिए। मंत्री ने साफ कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया गुणवत्ता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पेपर लीक पर भाजपा सरकार का दावा
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री खर्रा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि पिछली सरकारों के समय यह एक गंभीर समस्या थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस पर प्रभावी नियंत्रण किया है।
लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश
पाली नगर निगम के हॉल में आग लगने के बाद लंबे समय से लंबित प्रकरण पर भी मंत्री ने संज्ञान लिया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि इस मामले का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि नगर निगम से जुड़े कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
उद्योग, पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर
मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार उद्योगों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है, लेकिन साथ ही पर्यावरण और कानून के दायरे में रहकर ही समाधान चाहती है। पाली के 600 उद्योगों पर मंडरा रहा संकट अब सीईटीपी विवाद के समाधान और न्यायालय के निर्णय पर टिका हुआ है, जिस पर पूरे जिले की आर्थिक गतिविधियां निर्भर करती नजर आ रही हैं।


