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अजमेर दरगाह विवाद: ASI सर्वे और याचिका पर कोर्ट की कार्यवाही

अजमेर दरगाह विवाद: ASI सर्वे और याचिका पर कोर्ट की कार्यवाही

शोभना शर्मा, अजमेर।  ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में मंदिर होने के दावे पर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। 20 दिसंबर 2024 को इस मामले में दूसरी बार अजमेर सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की याचिका के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग से सर्वे कराने की मांग की गई है। इसके विरोध में दरगाह कमेटी ने याचिका खारिज करने के लिए आवेदन दिया है।

कोर्ट में अब तक की कार्यवाही

इस विवाद में कोर्ट ने 20 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 24 जनवरी 2025 के लिए निर्धारित की। इससे पहले, पहली सुनवाई में सभी पक्षों को नोटिस जारी किया गया था। शुक्रवार को कोर्ट में दरगाह कमेटी और अन्य संबंधित पक्ष उपस्थित थे। दरगाह कमेटी ने विष्णु गुप्ता की याचिका खारिज करने की मांग की, लेकिन उनके आवेदन को याचिका के विरोध में रिटन स्टेटमेंट दाखिल करने से पहले नियम-विरुद्ध माना गया। कोर्ट ने सभी पक्षों को गंभीरता से सुनते हुए अगली तारीख तक का समय दिया।

ASI सर्वे की मांग

विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता वरुण कुमार सिन्हा ने कोर्ट से अपील की कि इस मामले में ASI की जांच कराई जाए। उन्होंने यह तर्क दिया कि पुरातात्विक जांच से ही स्पष्ट होगा कि दरगाह की भूमि पर किसी मंदिर के होने का दावा सत्य है या नहीं। कोर्ट ने इस पर दरगाह कमेटी को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई में पक्ष रखने का निर्देश दिया।

दरगाह कमेटी का पक्ष

दरगाह कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ख्वाजा की दरगाह 800 वर्षों से उर्स और अन्य धार्मिक कार्यों का केंद्र रही है। यह स्थान देशभर में एकता और श्रद्धा का प्रतीक है। चिश्ती ने कहा, “यह तय करना कोर्ट का कार्य है कि दरगाह वर्शिप एक्ट के दायरे में आती है या नहीं। हम प्राइमरी पार्टी हैं और किसी भी जांच के विरोध में हैं।”

अन्य पक्षकारों की प्रार्थना

इस मामले में पांच अन्य व्यक्तियों ने 1/10 के तहत पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना-पत्र दाखिल किए हैं। कोर्ट ने इन प्रार्थना-पत्रों को रिकॉर्ड पर लिया है। इससे यह स्पष्ट है कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है और अन्य लोग भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दावा किया है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की भूमि पर पहले एक हिंदू मंदिर था। उन्होंने ASI की जांच के आधार पर इस दावे की पुष्टि की मांग की है। दरगाह कमेटी का कहना है कि यह मामला वर्शिप एक्ट के तहत आता है, जिसमें धार्मिक स्थलों की संरचना में बदलाव की अनुमति नहीं दी गई है।

अगले कदम

इस मामले में 24 जनवरी 2025 को सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि दरगाह परिसर में ASI का सर्वेक्षण होगा या नहीं। दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी। दरगाह कमेटी ने अपने विरोध में स्पष्ट रूप से कहा है कि सर्वेक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है, जबकि याचिकाकर्ता इसके जरिए सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

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