शोभना शर्मा। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें सरकारी स्कूलों में काम करने वाले कुक-कम-हेल्पर्स की कम सैलरी का मुद्दा भी शामिल रहा। शिव से विधायक रविंद्र भाटी ने यह मामला सदन में उठाया और कहा कि राज्य के 65000 सरकारी स्कूलों में कार्यरत कुक-कम-हेल्पर्स को केवल 3000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जो बहुत कम है। इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जवाब देते हुए कहा कि पहले इन कर्मचारियों को 1000 रुपये मानदेय दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 2143 रुपये कर दिया गया है। अब सरकार अप्रैल से इसमें और 15% की बढ़ोतरी करेगी, जिससे यह बढ़कर करीब 2800 रुपये हो जाएगा। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि कुक-कम-हेल्पर्स को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत लाने का फैसला श्रम विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। विधानसभा सत्र के दौरान कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई, जिनमें ड्रग विभाग में व्याप्त अनियमितताएं और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत शामिल थी।
अनधिकृत दवाओं की बिक्री का मुद्दा
विधायक गुरवीर सिंह ने ड्रग विभाग में फैली अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और कहा कि श्रीगंगानगर में बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री की जा रही है, जिससे नशाखोरी की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और पिछले बजट में घोषित 10 नशा मुक्ति केंद्रों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।
इसके जवाब में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि श्रीगंगानगर क्षेत्र में कुछ दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है और ड्रग विभाग नियमित रूप से जांच कर रहा है। जल्द ही इस दिशा में और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी स्कूलों के कुक-कम-हेल्पर्स की सैलरी का मुद्दा
विधायक रविंद्र भाटी ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत कुक-कम-हेल्पर्स की कम सैलरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल भोजन पकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जाता है।
मौजूदा वेतन और बढ़ोतरी:
पहले मानदेय: 1000 रुपये प्रति माह
वर्तमान मानदेय: 2143 रुपये प्रति माह
अप्रैल 2024 से बढ़ा हुआ वेतन: 2800 रुपये प्रति माह (15% बढ़ोतरी के साथ)
भाटी ने सरकार से यह भी मांग की कि इन कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत लाया जाए ताकि उन्हें अधिक वेतन मिल सके। हालांकि, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि कुक-कम-हेल्पर्स को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में शामिल करने का फैसला श्रम विभाग करेगा।
क्या कुक-कम-हेल्पर्स को न्यूनतम मजदूरी मिलेगी?
वर्तमान में कुक-कम-हेल्पर्स को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। वे केवल मानदेय के आधार पर कार्यरत हैं, इसलिए उन्हें वेतन बढ़ोतरी या अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता।हालांकि, अगर श्रम विभाग उन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत शामिल करता है, तो उनकी सैलरी में और भी बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन फिलहाल सरकार ने इस मामले को श्रम विभाग के ऊपर छोड़ दिया है।
न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
विधानसभा सत्र में विधायकों ने राज्य की न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में न्याय प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में समय लग रहा है। साथ ही, कई प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठे।


