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राजस्थान विधानसभा में अभद्र व्यवहार पर विवाद, रोहित बोहरा की हरकतों पर कार्रवाई की चेतावनी

राजस्थान विधानसभा में अभद्र व्यवहार पर विवाद, रोहित बोहरा की हरकतों पर कार्रवाई की चेतावनी

राजस्थान विधानसभा, जो देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में सबसे सम्मानित सदनों में गिनी जाती है, इन दिनों अपने सदस्यों के व्यवहार को लेकर गंभीर विवादों में घिरी हुई है। सदन की कार्यवाही के दौरान भाषा, इशारों और आचरण से जुड़ी घटनाओं ने न केवल प्रदेश की राजनीति को गर्माया है, बल्कि विधानसभा की परंपराओं और मर्यादा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब निंबाहेड़ा से भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा के पिछले दिन के व्यवहार को ‘अभद्र’ और ‘अमर्यादित’ बताते हुए सदन में तीखी आपत्ति जताई।

कृपलानी ने आरोप लगाया कि विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर अनुचित इशारों और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जो न केवल सदन की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि राजस्थान की राजनीतिक संस्कृति के भी विपरीत है। यह मामला देखते ही देखते गंभीर रूप ले गया और सदन की कार्यवाही के दौरान गरमागरम माहौल पैदा हो गया।

‘गालियां और अभद्र भाषा बर्दाश्त नहीं’ — कृपलानी

बहस के दौरान भाजपा विधायक कृपलानी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से विधानसभा की मर्यादा लगातार टूट रही है। उन्होंने पुरानी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पहले भी सदन में अनुचित भाषा का प्रयोग हुआ है। कृपलानी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे तथ्यों के सामने आने के बाद जनता के बीच विधानसभा की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने खासतौर पर रोहित बोहरा के इशारों और कथित आचरण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजस्थान की राजनीतिक परंपरा को ठेस पहुंचाता है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित संपादकीयों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मीडिया भी सदन की मर्यादा पर सवाल खड़े करने लगे, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। कृपलानी का यह कहना कि “ऐसे सदस्यों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जो भविष्य के लिए मिसाल बने”, सदन में मौजूद सभी सदस्यों को उनकी गंभीरता का अहसास कराने वाला था।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल का समर्थन

विवाद के दौरान सदन में बोलते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कृपलानी के आरोपों का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, उत्तेजना के क्षणों में भी संयम बनाए रखना आवश्यक है। पटेल ने यह भी कहा कि यदि सदस्यों का आचरण टीवी चैनलों और अखबारों की सुर्खियों में नकारात्मक रूप में उभरता है, तो यह पूरे सदन की छवि को खराब करता है। पटेल ने यहां तक कह दिया कि जिन सदस्यों का आचरण मर्यादित नहीं है, उन्हें सदन में बैठने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

कांग्रेस का बचाव और रफीक खान की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद के बीच जब विपक्ष पूरी तरह घिरता दिखा, तो कांग्रेस विधायक रफीक खान ने वातावरण शांत करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सदन में इस तरह की घटनाएं बहस के दौरान कभी-कभी घट जाती हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

कांग्रेस का दावा था कि सदन में तीखी नोकझोंक अक्सर होती है और यह लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा है। लेकिन भाजपा विधायकों का कहना था कि बोहरा के इशारे और शब्द मात्र तीखी नोकझोंक नहीं, बल्कि सदन की अवमानना हैं और इसके लिए बिना शर्त माफी आवश्यक है।

स्पीकर वासुदेव देवनानी की कड़ी चेतावनी

पूरा विवाद सामने आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राजस्थान की आठ करोड़ जनता सदन की हर गतिविधि को लाइव देख रही है और ऐसे में सदस्यों के आचरण का स्तर उच्चतम होना चाहिए।

देवनानी ने घोषणा की कि वे विवादित वीडियो फुटेज की खुद जांच करेंगे। यदि वीडियो में रोहित बोहरा का व्यवहार अनुचित पाया गया, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संकेत के बाद विधानसभा में खामोशी छा गई और मामला और भी ज्यादा गंभीर हो गया।

क्या रोहित बोहरा पर कार्रवाई तय है?

रोहित बोहरा की पहचान प्रदेश राजनीति में एक तेजतर्रार और मुखर नेता के तौर पर है। लेकिन इस विवाद ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। कई राजनीतिक विश्लेषक यह अनुमान लगा रहे हैं कि यदि वीडियो फुटेज में आरोप साबित हो जाते हैं, तो बोहरा को सदन से निलंबित भी किया जा सकता है।

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