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मुकंदरा टाइगर रिजर्व में दिलावर की पदयात्रा पर विवाद

मुकंदरा टाइगर रिजर्व में दिलावर की पदयात्रा पर विवाद

राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की प्रस्तावित पदयात्रा अब विवादों में घिर गई है। यह पदयात्रा 13 से 16 मार्च के बीच कोटा जिले के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरने वाली है। हालांकि वन विभाग ने फिलहाल इस यात्रा को अनुमति नहीं दी है और मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया है।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में इस प्रकार की पदयात्रा निकालना वन्यजीव संरक्षण कानूनों के खिलाफ हो सकता है। इसी कारण इस पूरे मामले ने प्रशासनिक और पर्यावरणीय हलकों में चर्चा छेड़ दी है।

टाइगर रिजर्व के संवेदनशील इलाके से गुजरने वाली है यात्रा

जानकारी के अनुसार शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पदयात्रा उन गांवों से होकर गुजरने वाली है जो मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के भीतर या उसके बेहद करीब स्थित हैं। इन इलाकों में बाघों की आवाजाही दर्ज की जाती रही है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस क्षेत्र में वर्तमान में चार बाघ और एक शावक के मूवमेंट की जानकारी है। यही वजह है कि इस इलाके को संवेदनशील माना जाता है। टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आमतौर पर लोगों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध होते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कोर एरिया में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश के लिए सख्त नियम लागू होते हैं। ऐसे में किसी मंत्री की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के साथ पदयात्रा निकालने की योजना कई सवाल खड़े कर रही है।

वन विभाग ने अभी नहीं दी अनुमति

मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने फिलहाल इस पदयात्रा के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अंतिम निर्णय लेने से पहले राज्य के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से मार्गदर्शन मांगा गया है।

मुकंदरा टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक मुथु एस ने कहा कि इस विषय में उच्च अधिकारियों से परामर्श लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गिरधरपुरा, कोलीपुरा और दामोदरपुरा जैसे गांव टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में आते हैं। ऐसे में वहां पदयात्रा निकालना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से स्पष्ट निर्देश नहीं मिल जाते, तब तक यात्रा को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता।

मंत्री ने जारी किया पदयात्रा का रूट चार्ट

इस बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपनी प्रस्तावित पदयात्रा का विस्तृत रूट चार्ट भी जारी किया है। इस संबंध में उन्होंने कोटा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक सहित कई विभागों को पत्र भेजा है।

इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि यात्रा का अधिकांश हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने इस संबंध में कोटा और मुकंदरा टाइगर रिजर्व के उप वन संरक्षक सहित कुल 14 विभागों को पत्र भेजा है। मंत्री ने अपने पत्र में अधिकारियों से यह भी कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों को यात्रा में उपस्थित रहने के लिए निर्देशित करें।

चार दिनों में तय होगा लंबा पैदल सफर

मदन दिलावर की यह पदयात्रा चार दिनों तक चलेगी और इसमें कई गांवों को कवर किया जाएगा। पहले दिन 13 मार्च को यह यात्रा नयागांव से शुरू होकर डोबड़ा, पदमपुरा कोथला, धोलपुरा, डडवाड़ा, भंवरिया, कंवरपुरा, हरिपुरा, रांवठा और सोहनपुरा तक लगभग 14 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दिन सोहनपुरा में भोजन और रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है।

14 मार्च को यात्रा सोहनपुरा से शुरू होकर मोहनपुरा मंदरगढ़, देवनली और दामोदरपुरा तक करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस दिन भोजन और रात्रि विश्राम देवनली और दामोदरपुरा में प्रस्तावित है।

15 मार्च को यात्रा देवनली दामोदरपुरा से केशवपुरा, जसपुरा, किशनपुरा, डोलिया, गुर्जर ढाणी और चांद बावड़ी होते हुए गिरधरपुरा तक पहुंचेगी। इस दिन लगभग 21 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया जाएगा और गिरधरपुरा में रात्रि विश्राम होगा।

यात्रा के अंतिम दिन 16 मार्च को गिरधरपुरा से कोलीपुरा, भेरूपुरा, बोराबास, कोटा डेम की टपरिया, जामुनिया बावड़ी और बलिंडा तक करीब 23 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा।

गांवों की समस्याएं सुनने के लिए पदयात्रा

मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि इस पदयात्रा का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना है। उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा इसलिए रखी गई है ताकि गांवों में जाकर स्थानीय लोगों से सीधे संवाद किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि दामोदरपुरा, कोलीपुरा और गिरधरपुरा जैसे गांवों में वन विभाग से जुड़े कई मुद्दे सामने आए हैं। पदयात्रा के दौरान इन समस्याओं को भी देखा और समझा जाएगा। मंत्री का मानना है कि इस प्रकार की यात्राओं से प्रशासन को जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है और उनका समाधान करने में आसानी होती है।

पर्यावरण और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

हालांकि इस पदयात्रा को लेकर पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही से वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाघों की मौजूदगी वाले इलाके में इतनी लंबी पदयात्रा निकालना जोखिम भरा हो सकता है।

अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला वन विभाग और राज्य के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के निर्देशों पर निर्भर करेगा। यदि अनुमति मिलती है तो यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी, जबकि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल इस मुद्दे ने प्रशासन, पर्यावरण विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दे दिया है और सभी की नजर अब वन विभाग के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।

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