राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक रूसी सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर द्वारा हाथी और एक महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। शुरुआत में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन कुछ समय बाद उसी हाथी की मौत की खबर सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देशभर में पशु अधिकार और नैतिकता से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाथी गांव में हुआ था फोटोशूट
जानकारी के अनुसार यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गाँव में किया गया था। यहां एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर ने “पिंक सिटी” की पहचान को दर्शाने के उद्देश्य से थीम आधारित शूट कराया था। इस दौरान एक बुजुर्ग हाथी और एक महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगा गया। वीडियो सामने आने के बाद ही कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए थे कि क्या इस तरह जानवरों को रंगना सुरक्षित है और क्या इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी।
इंफ्लुएंसर और मॉडल की पहचान
बताया जा रहा है कि इस फोटोशूट में शामिल इंफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा हैं, जो रूस की रहने वाली हैं और जयपुर घूमने आई थीं। उन्हें जयपुर का गुलाबी रंग इतना आकर्षक लगा कि उन्होंने इसी थीम पर यह शूट कराया। इस शूट में शामिल मॉडल का नाम यशस्वी बताया जा रहा है। वीडियो और तस्वीरें करीब तीन महीने पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई थीं, जो अब दोबारा वायरल हो रही हैं।
हाथी की मौत के बाद बढ़ा विवाद
करीब डेढ़ महीने पहले उस हाथी की मौत हो गई, जिसके बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पशु प्रेमियों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हाथी को केमिकल युक्त रंग से रंगना उसकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है और यही उसकी मौत का कारण भी हो सकता है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने इसे स्पष्ट रूप से पशु क्रूरता का मामला बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वन विभाग ने दिए जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद राजस्थान के वन विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि बिना अनुमति के जानवर के साथ किसी प्रकार की क्रूरता की गई है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग यह भी जांच करेगा कि इस्तेमाल किया गया रंग सुरक्षित था या नहीं और क्या इस पूरे शूट के लिए आवश्यक नियमों का पालन किया गया था।
स्थानीय पक्ष ने आरोपों को किया खारिज
इस मामले में बबलू खान, जो हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष हैं, ने पशु क्रूरता के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हाथी को केवल कुछ समय के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाथी पहले से ही काफी बुजुर्ग था और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। ऐसे में इस घटना को उसकी मौत से जोड़ना गलत है।
पशु अधिकार और नैतिकता पर बहस
यह मामला अब केवल एक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पशु अधिकार और नैतिकता पर व्यापक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मनोरंजन या प्रचार के लिए जानवरों का इस तरह उपयोग करना कई बार उनकी सेहत और व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में स्पष्ट नियम और उनकी सख्त निगरानी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


