अजमेर में शहरी विकास से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां Ajmer Development Authority (ADA) द्वारा निर्मित नई मल्टी स्टोरी बिल्डिंग को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। जयपुर रोड स्थित इस भवन के निर्माण में न केवल प्राकृतिक जल निकासी मार्ग यानी नाले का स्वरूप बदले जाने का आरोप है, बल्कि यह भी कहा जा रहा है कि नियमानुसार आवश्यक बफर जोन भी नहीं छोड़ा गया। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और शहरी नियोजन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस जी प्लस-4 भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। लगभग 0.8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस इमारत को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, जिसमें बेसमेंट पार्किंग से लेकर विभिन्न विभागों के कार्यालय, मीटिंग हॉल, कैंटीन और सोलर पैनल जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। लेकिन इसी भवन के निर्माण को लेकर स्थानीय निवासी और शिकायतकर्ता अशोक मलिक ने गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। उनका आरोप है कि भवन निर्माण के दौरान वहां से गुजरने वाले नाले का मार्ग बदला गया और उसके आसपास जरूरी बफर जोन नहीं छोड़ा गया, जो कि स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
अशोक मलिक का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है, बल्कि अन्य लोगों को भी अतिक्रमण के लिए प्रोत्साहन मिलता है। उनके अनुसार, जब एक सरकारी एजेंसी ही नियमों की अनदेखी करेगी, तो आम नागरिकों में भी गलत संदेश जाएगा और वे भी नालों व जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण करने लगेंगे। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि आने वाले मानसून में इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने राजस्थान टाउनशिप नीति 2024 के प्रावधानों का हवाला दिया है, जिसके अनुसार किसी भी नाले या जल निकासी मार्ग के किनारे निर्धारित चौड़ाई के अनुसार बफर जोन छोड़ना अनिवार्य है। यदि नाले की चौड़ाई 10 मीटर से अधिक है, तो कम से कम 9 मीटर का बफर जोन रखना जरूरी होता है, जबकि 10 मीटर तक की चौड़ाई वाले नालों के लिए कम से कम 6 मीटर का बफर अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि किसी नाले का चैनलीकरण किया गया है, तो भी विकास योजना के अनुसार न्यूनतम 9 मीटर का बफर जोन बनाए रखना आवश्यक होता है। इन नियमों का उद्देश्य जल निकासी को सुचारू बनाए रखना और बाढ़ या जलभराव जैसी समस्याओं से बचाव करना है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगरीय विकास विभाग द्वारा 20 फरवरी 2023 को जारी आदेशों में भी यही बफर मानक निर्धारित किए गए थे। इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य बफर जोन के भीतर किया गया है, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। अशोक मलिक ने मांग की है कि इस मामले में सक्षम अधिकारियों द्वारा तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और नाले की वास्तविक सीमा का निर्धारण किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि वहां 6 मीटर का बफर लागू होता है या 9 मीटर का, और यदि निर्माण इस सीमा के भीतर पाया जाता है, तो उसे तुरंत हटाया जाए।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे National Green Tribunal का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इस भवन का हाल भी शहर के सेवन वंडर प्रोजेक्ट जैसा हो सकता है, जहां निर्माण के बाद विवाद और समस्याएं सामने आई थीं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस निर्माण को लेकर आपत्ति उठाई गई हो। अशोक मलिक ने अक्टूबर 2023 में भी इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि नाला भूमि पर कब्जा कर बहुमंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने खसरा नंबर 576 और 579 का हवाला देते हुए बताया था कि यह भूमि नाले के रूप में दर्ज है और इस पर निर्माण कार्य करना नियमों के खिलाफ है। उस समय भी उन्होंने निर्माण कार्य रोकने और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की मांग की थी, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस संस्था पर नियमों को लागू करने और उनकी पालना सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी है, उसी पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। इससे न केवल प्रशासन की साख पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता के बीच भी गलत संदेश जाता है। शहरी विकास के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इसका सीधा असर नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।
फिलहाल इस मामले में अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आयुक्त के. नित्या से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिल पाया। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में नियमों के अनुसार स्थिति को सुधारा जाएगा या नहीं।


