राजस्थान में इन दिनों यूथ कांग्रेस के विभिन्न पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। संगठन के अध्यक्ष, महासचिव, विधानसभा अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों के लिए ऑनलाइन मतदान कराया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप के जरिए संचालित की जा रही है, लेकिन अब इस चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ऑनलाइन वोटिंग के दौरान कथित फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आने के बाद संगठन की चुनाव प्रणाली विवादों में घिर गई है। आरोप है कि ऐसे लोगों के नाम से भी वोट डाले गए हैं, जिनका कांग्रेस या यूथ कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है। इतना ही नहीं, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के नाम से भी सदस्यता और मतदान होने के दावे किए जा रहे हैं।
हाल ही में सामने आए मामलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार हनुमान बेनीवाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती के नाम से भी यूथ कांग्रेस चुनाव में वोटिंग होने का मामला सामने आया। दोनों नेताओं का कांग्रेस संगठन से किसी प्रकार का संबंध नहीं है, फिर भी उनके नाम और मोबाइल नंबर का उपयोग कर सदस्यता लेने और मतदान करने की बात सामने आने के बाद चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यूथ कांग्रेस चुनाव में मतदान करने के लिए पहले मोबाइल नंबर के जरिए सदस्यता लेना जरूरी होता है। सदस्यता प्रक्रिया के दौरान संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है और ओटीपी सत्यापन के बाद ही वोटिंग का अधिकार मिलता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब हनुमान बेनीवाल और सुमेधानंद सरस्वती के वास्तविक मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए गए, तो ओटीपी किसने प्राप्त किया और सदस्यता प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। इस मामले में अब तक किसी भी जिम्मेदार पदाधिकारी की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
इस पूरे विवाद का खुलासा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अभिषेक चौधरी के समर्थकों द्वारा किए जाने का दावा किया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है और यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो संगठन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी तरीके से सदस्यता लेकर मतदान कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव की भावना को नुकसान पहुंच रहा है।
फर्जी मतदान के खिलाफ अब संगठन के भीतर शिकायत अभियान भी शुरू कर दिया गया है। अभिषेक चौधरी के समर्थकों ने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी फर्जी वोटिंग या संदिग्ध सदस्यता का मामला सामने आए तो उसकी तुरंत शिकायत करें। इसके लिए विभिन्न ईमेल आईडी भी जारी की गई हैं, जहां संबंधित शिकायतें भेजी जा सकती हैं। समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा का सवाल है। उनका दावा है कि यदि फर्जी वोटिंग को नहीं रोका गया तो चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल और ऑनलाइन चुनाव प्रक्रिया जितनी सुविधाजनक दिखाई देती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी होती है। खासतौर पर जब सदस्यता और मतदान पूरी तरह मोबाइल आधारित हो, तब डेटा सुरक्षा, ओटीपी सत्यापन और पहचान की गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि राजनीतिक संगठनों को डिजिटल चुनाव प्रक्रिया में अधिक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अपनाने की जरूरत है।
इस विवाद के बाद संगठन के कई कार्यकर्ता भी असमंजस की स्थिति में नजर आ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि बड़े नेताओं के नाम से भी फर्जी मतदान संभव है, तो सामान्य कार्यकर्ताओं की पहचान और वोट की सुरक्षा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं दूसरी ओर कुछ नेताओं का कहना है कि तकनीकी खामियों के चलते इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं और संगठन को तुरंत जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
यूथ कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हुई थी और यह करीब एक महीने तक जारी रही। अब 20 मई को मतदान का अंतिम दिन है। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मतदान की अवधि आगे बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ऐसे में जो सदस्य मतदान करना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल संगठन की विश्वसनीयता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर खड़ा हो गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फर्जी सदस्यता और मतदान के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो भविष्य में ऑनलाइन चुनाव प्रणाली को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। डिजिटल तकनीक लोकतंत्र को आसान और सुलभ बनाने का माध्यम बन सकती है, लेकिन इसके लिए मजबूत सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।


