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ज्ञानदेव आहूजा का विवादित बयान, बोले– मेरा टिकट वसुंधरा राजे ने काटा था

ज्ञानदेव आहूजा का विवादित बयान, बोले– मेरा टिकट वसुंधरा राजे ने काटा था

राजस्थान की रामगढ़ विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा एक बार फिर अपने विवादित और बड़बोले बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। शनिवार को अजमेर पहुंचे आहूजा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनका विधानसभा टिकट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने काटा था। उन्होंने कहा, “मैं कोई भूत-पिशाच नहीं हूं, मेरा टिकट वसुंधरा राजे जी ने काटा था। मैं बीजेपी का हूं और बीजेपी का ही रहूंगा।”

उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब वे अब भी अपनी गाड़ी पर “विधायक” लिखवाकर घूमते नजर आए। इसी को लेकर मीडिया ने उनसे सवाल किया, जिसके बाद यह पूरा मामला फिर से राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

गाड़ी पर ‘विधायक’ लिखे होने पर भड़के आहूजा

दरअसल, ज्ञानदेव आहूजा शनिवार को अजमेर दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने से जुड़ी याचिका के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान वे हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के साथ मौजूद थे। जब पत्रकारों ने उनकी गाड़ी पर “विधायक” लिखे होने को लेकर सवाल उठाया, तो आहूजा ने तीखे अंदाज में जवाब दिया।

उन्होंने खुद को भाजपा से जुड़ा बताते हुए कहा कि वे पार्टी का ही हिस्सा हैं और पार्टी से अलग नहीं हुए हैं। सवालों से असहज होते हुए उन्होंने अपने ही अंदाज में जवाब दिया और “जय श्री राम” कहते हुए वहां से रवाना हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

वसुंधरा राजे का नाम लेकर दिया बयान

ज्ञानदेव आहूजा का यह कहना कि उनका टिकट वसुंधरा राजे ने काटा था, राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। भाजपा के भीतर गुटबाजी और पुराने राजनीतिक समीकरणों की चर्चा के बीच इस बयान को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं आहूजा

यह पहली बार नहीं है जब ज्ञानदेव आहूजा विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनके कई बयान और कृत्य सियासी विवाद का कारण बन चुके हैं। पिछले साल अलवर में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के मंदिर आगमन के बाद आहूजा द्वारा गंगाजल से मंदिर का छिड़काव किया गया था। कांग्रेस ने इस कदम को दलित विरोधी कृत्य करार दिया था।

इस मामले में उनके बयान और व्यवहार को लेकर राज्यभर में विरोध हुआ था। लगातार विवादों में रहने और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अप्रैल 2025 में ज्ञानदेव आहूजा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

निष्कासन के बाद भी बयान जारी

पार्टी से निष्कासित होने के बावजूद ज्ञानदेव आहूजा लगातार सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय नजर आ रहे हैं और खुद को भाजपा से जुड़ा हुआ बताते रहे हैं। उनकी गाड़ी पर “विधायक” लिखा होना भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं।

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