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MDSU में संविधान दिवस समारोह, राज्यपाल बागड़े ने कहा— अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ अपशब्द नहीं

MDSU  में संविधान दिवस समारोह, राज्यपाल बागड़े ने कहा— अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ अपशब्द नहीं

मनीषा शर्मा, अजमेर ।  MDSU अजमेर में बुधवार को संविधान दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने की। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में संविधान के महत्व, उसके निर्माण और उसकी बुनियादी मूल्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकगण और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

राज्यपाल के आगमन पर उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल, कुलसचिव कैलाश चंद शर्मा और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल ने सबसे पहले संविधान पार्क का दौरा किया, जिसके बाद उन्होंने सरस्वती मंदिर में दर्शन किए।

संविधान में मिली स्वतंत्रता का सही उपयोग जरूरी: राज्यपाल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भारत के संविधान की विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है, लेकिन इस स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब उसका उपयोग मर्यादा, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किया जाए।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन यहां भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे संविधान में निहित मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अपने मौलिक कर्तव्यों को भी समझें और उनका पालन करें।

डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान निर्माण का ऐतिहासिक प्रसंग

अपने संबोधन में राज्यपाल बागड़े ने संविधान निर्माण समिति में डॉ. भीमराव अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह अंबेडकर को संविधान निर्माण समिति में शामिल करने का निर्णय ऐतिहासिक साबित हुआ।

उन्होंने कहा कि अंबेडकर की दूरदर्शिता, विधिक समझ और सामाजिक सरोकारों ने भारतीय संविधान को दुनिया के सबसे व्यापक और संतुलित संविधानों में से एक बनाया है। राज्यपाल ने अंबेडकर से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया, जिसके जरिए उन्होंने बताया कि संविधान निर्माण समिति में अंबेडकर का योगदान कितना महत्वपूर्ण और निर्णायक था।

देशवासी संविधान को स्वीकार करें और गर्व महसूस करें

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि संविधान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे “अंगीकृत” किया गया है। अंगीकृत करने का अर्थ है— देशवासी इसे पूरी निष्ठा और स्वेच्छा से स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस मनाने की परंपरा स्थापित कर देश को अपने संविधान के प्रति जागरूक और सजग बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को न केवल संविधान पढ़ना चाहिए, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है।

उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटिश काल में लॉर्ड मैकाले ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को बदलकर हमारी संस्कृति पर चोट पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन आज हमारी शिक्षा और हमारी संस्कृति दोनों को संविधान ने मजबूत आधार दिया है।

कश्मीर को भारत से अलग रखने की साजिश और ऐतिहासिक घटनाएं

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कश्मीर से जुड़े इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब कश्मीर को भारत से अलग रखने की साजिश रची गई थी। उन्होंने बताया कि डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने इस साजिश के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया था।

राज्यपाल ने कहा कि कई वर्षों तक कश्मीर में तिरंगा फहराना भी आसान नहीं था। पहली बार डॉ. मनोहर जोशी ने कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था, और उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं थे। उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि राष्ट्रहित के मामलों में दृढ़ता और साहस कितना महत्वपूर्ण होता है।

युवाओं को संविधान के मूल्यों को अपनाने की अपील

समारोह के अंत में राज्यपाल बागड़े ने युवाओं से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों— न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे युवा ही तय करेंगे। इसलिए उन्हें संविधान को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

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