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“जाति के आधार पर छोटा-बड़ा मानना सबसे बड़ा अपराध”:भैय्याजी जोशी

“जाति के आधार पर छोटा-बड़ा मानना सबसे बड़ा अपराध”:भैय्याजी जोशी

शोभना शर्मा।  देश में जातिगत जनगणना को लेकर चल रही चर्चा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता भैय्याजी जोशी ने जातिगत व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। जयपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर महानगर द्वारा आयोजित विजयदशमी उत्सव एवं पथ संचलन कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने कहा कि जाति के आधार पर किसी को छोटा या बड़ा मानना सबसे बड़ा अपराध है। उन्होंने इस व्यवस्था को समाज के लिए हानिकारक बताया और इसके खिलाफ आवाज उठाने की बात की।

जाति व्यवस्था पर सवाल

अपने भाषण में भैय्याजी जोशी ने जाति व्यवस्था को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “किसी को छोटा-बड़ा, ऊंचा-नीचा मानने का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब गलत भावनाएं समाज में फैलती हैं, तो वे बड़ी समस्याओं का रूप ले लेती हैं। भैय्याजी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में जातिगत जनगणना को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है, जिसे कई लोग समाज के भेदभाव को मिटाने का एक जरिया मानते हैं, जबकि कई इसके दुरुपयोग की संभावना से चिंतित हैं।

जातिगत जनगणना पर भैय्याजी का बयान

भैय्याजी जोशी के इस बयान को जातिगत जनगणना के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर जातिगत जनगणना पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके विचारों को इस मुद्दे पर संघ के पिछले बयानों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले आरएसएस ने जातिगत जनगणना का सशर्त समर्थन किया था। संघ का कहना था कि जातिगत जनगणना लोगों के कल्याण के लिए होनी चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि संघ इस मुद्दे पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहता है, जो समाज के सभी वर्गों के कल्याण पर केंद्रित हो।

हिंदू समाज में एकता की वकालत

भैय्याजी जोशी ने जातियों के आधार पर समाज में बंटवारे की निंदा करते हुए हिंदू समाज में एकता की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “जन्म के आधार पर जातियां तय होती हैं, लेकिन क्या हम सिर्फ अपनी जाति की वजह से महापुरुषों के वंशज कहलाते हैं?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “क्या हमारे धार्मिक स्थल किसी एक जाति के हैं?” उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति अपने आप को हिंदू मानता है, उसे इस तरह के विभाजन से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।

भैय्याजी ने कहा कि जैसे राज्य की सीमाएं हमें विभाजित नहीं कर सकतीं, उसी तरह जन्म पर आधारित चीजें भी हमें विभाजित नहीं कर सकतीं। अगर किसी के मन में कोई भ्रम या अहंकार है, तो उसे समाप्त करके हमें एक समाज के रूप में संगठित होना चाहिए।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता

भैय्याजी जोशी ने अपने भाषण में देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत के लोग बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्राहक बनते जा रहे हैं और दुनिया के कई देश भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपने स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम करना चाहिए।

भैय्याजी ने कहा कि “भारत 140 करोड़ लोगों का देश है, और दुनिया के अन्य देश इसे एक बाजार की तरह देखते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत हमेशा ऐसा ही रहेगा या अपने पैरों पर खड़ा होकर अपनी पहचान बनाएगा?” उन्होंने देशभक्ति के भाव से जनता को जागरूक रहने और अपने आचरण के प्रति सजग रहने की अपील की।

नागरिक कर्तव्यों की जागरूकता पर जोर

भैय्याजी जोशी ने नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों की समझ पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में सफाई अभियान चलाने की जरूरत पड़ती है, जबकि दुनिया के अन्य देशों में लोग अपने-अपने परिसर को खुद साफ रखते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के “स्वच्छ भारत अभियान” की सराहना करते हुए कहा कि जब हर भारतीय यह संकल्प लेगा कि वह गंदगी नहीं करेगा, तो देश को साफ-सुथरा होने में देर नहीं लगेगी।

मतदान में कम भागीदारी पर चिंता

भैय्याजी ने भारत में शत-प्रतिशत मतदान न होने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को मतदान का अधिकार दिया है, फिर भी शिक्षित लोग भी मतदान में हिस्सा नहीं लेते। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने इस अधिकार का प्रयोग करना चाहिए और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए।

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