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मनरेगा नाम बदलने पर कांग्रेस का विरोध, कोटा में बीजेपी सरकार पर हमला

मनरेगा नाम बदलने पर कांग्रेस का विरोध, कोटा में बीजेपी सरकार पर हमला

मनीषा शर्मा।  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कोटा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और बीजेपी सरकार पर महात्मा गांधी के विचारों और ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। यह प्रदर्शन शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम और देहात जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह के नेतृत्व में रामपुरा स्थित गांधी प्रतिमा के पास किया गया।

भानुप्रताप सिंह का आरोप, नाम बदलने में माहिर है बीजेपी

कोटा से कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने कहा कि यूपीए सरकार ने मनरेगा की शुरुआत हर व्यक्ति को रोजगार देने और ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की थी। इस योजना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काम मिला और गांवों से शहरों की ओर पलायन पर रोक लगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार को योजनाओं के मूल उद्देश्य से कोई सरोकार नहीं है, बल्कि वह सिर्फ नाम बदलने में माहिर है।

भानुप्रताप सिंह ने कहा कि अब मनरेगा का नाम बदलकर ‘वीबी जी राम जी’ यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण रख दिया गया है, जो आम जनता की समझ से परे है। उन्होंने इसे अजीब और भ्रामक नाम बताते हुए कहा कि नाम बदलने से न तो योजना बेहतर हो जाएगी और न ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान होगा।

गांधी के नाम से योजना हटाने पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसी योजना का नाम बदल देने से महात्मा गांधी का सम्मान कम नहीं हो सकता। शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने कहा कि बीजेपी महात्मा गांधी के नाम और विचारधारा को योजनाओं से हटाकर उनका अपमान करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।

राखी गौतम ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान मनरेगा को ग्रामीण भारत की रीढ़ के रूप में लागू किया गया था। इसका मकसद सिर्फ रोजगार देना नहीं था, बल्कि ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों का निर्णय लेने का अधिकार देना भी था।

बीजेपी की नीयत पर सवाल

राखी गौतम ने बीजेपी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज सरकार की सोच और नीयत में खोट साफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ नाम बदलने के लिए योजना में बदलाव कर रही है। सरकार दावा कर रही है कि 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा, लेकिन इसकी क्या गारंटी है, यह साफ नहीं किया जा रहा।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर रोजगार बढ़ाया जा रहा है तो क्या मजदूरी भी बढ़ाई गई है। राखी गौतम ने कहा कि पहले केंद्र सरकार मनरेगा में 90 प्रतिशत भुगतान करती थी और राज्य सरकार का हिस्सा सिर्फ 10 प्रतिशत होता था, लेकिन अब राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत भुगतान का बोझ डाला जा रहा है। इसे उन्होंने राज्यों को गुमराह करने और ग्रामीणों से आजीविका का साधन छीनने की कोशिश बताया।

मनरेगा ने रोका था गांवों से पलायन

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय शुरू हुई यह योजना ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार देने के लिए थी। इससे न केवल लाखों परिवारों को आर्थिक संबल मिला, बल्कि गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन भी काफी हद तक रुका। उन्होंने आरोप लगाया कि अब बीजेपी सरकार नाम बदलकर और संरचना में बदलाव कर ग्राम सभाओं की ताकत छीन रही है।

कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पहले यह तय होता था कि गांव में कौन सा काम किया जाएगा, लेकिन अब ऊपर से काम तय होंगे और मजदूर स्थानीय होंगे। इससे ग्राम स्वराज की भावना कमजोर होगी।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार

मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कांग्रेस ने कहा कि अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच भी हुई होगी। किसी योजना में खामियां बताकर उसका नाम और स्वरूप बदल देना समाधान नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है और गरीबों की योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि मनरेगा का नाम बदलने और उसकी मूल भावना को कमजोर करने के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि महात्मा गांधी के सपनों का भारत गांवों से ही मजबूत होगा और किसी भी सूरत में ग्रामीण रोजगार और ग्राम सभाओं को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

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