कोटा में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेत्री डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय पर झूठ, भ्रम और राजनीतिक प्रचार का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उनका आरोप था कि मोदी सरकार ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के बजाय इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया।
गुमानपुरा स्थित कांग्रेस कार्यालय में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. अर्चना शर्मा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के नाम पर भावनात्मक राजनीति कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को सीधे लागू करने के बजाय सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ दिया, जिससे इसका लाभ तत्काल महिलाओं तक नहीं पहुंच सकेगा।
इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस शहर अध्यक्ष राखी गौतम और देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने में गंभीर नहीं है।
अर्चना शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा वर्षों से देश में चर्चा का विषय रहा है और इसे लागू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इसे चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के चुनाव से पहले नारी शक्ति वंदन बिल लाया गया, ताकि राजनीतिक संदेश दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि बिल ऐसे समय में लाया गया जब देश में जनगणना की प्रक्रिया लंबित थी और परिसीमन का मुद्दा भी सामने था। सरकार ने बिल को इन दोनों प्रक्रियाओं से जोड़ दिया, जिसका सीधा मतलब यह था कि जब तक जनगणना और परिसीमन नहीं होंगे, तब तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस नेत्री ने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया।
अर्चना शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देना चाहती, तो वर्तमान सीटों की संख्या के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू किया जा सकता था। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया और इस मुद्दे को भविष्य की प्रक्रियाओं में उलझा दिया। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ छल और राजनीतिक रणनीति बताया।
उन्होंने राजस्थान की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की सबसे बड़ी महिला नेता आज सक्रिय राजनीति से दूर बैठी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा महिला सशक्तिकरण की पक्षधर है, तो फिर महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका क्यों नहीं दी जा रही। उनके इस बयान को राज्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष राखी गौतम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के समर्थन में रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1992 में कांग्रेस सरकार ने नगर निकायों और पंचायतों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर देश में नई राजनीतिक भागीदारी का रास्ता खोला था। उनके अनुसार, कांग्रेस ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देकर सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी थी।
राखी गौतम ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर केवल दिखावटी राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे लंबे समय तक लटकाए रखा। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। एक ओर वह महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात करती है, दूसरी ओर ठोस फैसलों को टालती रहती है।
कांग्रेस के देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने कहा कि यदि केंद्र सरकार मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों और विधानसभा सीटों पर सीधे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करती है, तो कांग्रेस उसका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में है और किसी भी सकारात्मक कदम का स्वागत करेगी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर उसे टालने का प्रयास करती है, तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य बिल को लागू करना नहीं, बल्कि उसे प्रक्रियात्मक उलझनों में फंसाना है।
कोटा में हुई इस प्रेस वार्ता को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के माहौल में महिला आरक्षण का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। कांग्रेस इस विषय को महिलाओं के अधिकार, प्रतिनिधित्व और भाजपा की नीतियों से जोड़कर जनता के बीच ले जाना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण देश की राजनीति में संवेदनशील और प्रभावशाली मुद्दा है। महिलाओं की आबादी और मतदाता भागीदारी को देखते हुए यह विषय चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।


