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पचपदरा रिफाइनरी पर हरदीप पुरी की पोस्ट से कांग्रेस का हंगामा

पचपदरा रिफाइनरी पर हरदीप पुरी की पोस्ट से कांग्रेस का हंगामा

मनीषा शर्मा। राजस्थान की महत्वाकांक्षी पचपदरा रिफाइनरी परियोजना एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ हाल ही में रिफाइनरी का दौरा किया और इसके कार्यों की समीक्षा की। दौरे के बाद पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए रिफाइनरी को “जोधपुर स्थित राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड” बताया।

असल में यह रिफाइनरी बालोतरा जिले के पचपदरा कस्बे में स्थित है। पुरी की इस ‘गलती’ ने तुरंत ही राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। कांग्रेस ने इसे भाजपा की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ताधारी दल अपनी ही महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर लापरवाह है।

कांग्रेस का पलटवार: “भाजपा गंभीर नहीं”

नेता प्रतिपक्ष जूली ने एक्स पर ही पुरी को घेरते हुए लिखा कि केंद्रीय मंत्री का ट्वीट यह साबित करता है कि भाजपा सरकार पचपदरा रिफाइनरी को लेकर कितनी गंभीर है।

जूली ने कहा:

“जब देश के पेट्रोलियम मंत्री ही रिफाइनरी की सही लोकेशन नहीं जानते और इसे पचपदरा-बालोतरा की बजाय जोधपुर बताते हैं, तो यह भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस परियोजना के उद्घाटन को लेकर भी गंभीर नहीं है।

उद्घाटन की तारीख पर चुप्पी से बढ़ा संदेह

कांग्रेस ने भाजपा पर यह भी निशाना साधा कि 2025-26 के बजट की घोषणा संख्या 158 में यह स्पष्ट कहा गया था कि पचपदरा-बालोतरा रिफाइनरी अगस्त 2025 से उत्पादन शुरू करेगी

लेकिन रविवार को हुए दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और न ही केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने उद्घाटन की संभावित तारीख पर कोई बयान दिया।

जूली ने सवाल उठाया:

  • क्या भाजपा सरकार सदन में की गई अपनी घोषणाओं पर गंभीर नहीं है?

  • क्या जनता को बिना जवाबदेही के अंधेरे में रखा जा रहा है?

कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो उद्घाटन और उत्पादन शुरू होने की स्पष्ट तारीख क्यों नहीं बताई जा रही।

हरदीप पुरी का दावा: “इंजीनियरिंग का चमत्कार”

हरदीप पुरी ने अपनी पोस्ट में रिफाइनरी को “भारत के ऊर्जा सुरक्षा अभियान का अहम स्तंभ” बताते हुए कई तकनीकी पहलुओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि यह रिफाइनरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के विजन में योगदान करेगी।

पुरी ने यह भी बताया कि उन्होंने भारत के सबसे बड़े एल्युमिनियम डीसीयू कोक ड्रम को देखा, जो डेरिक सहित 111 मीटर ऊंचा है और 62 मीटर की ऊंचाई से इसका नजारा बेहद शानदार था।

उनके मुताबिक:

  • यह रिफाइनरी थर्मल क्रैकिंग तकनीक से लंबी श्रृंखला वाले वैक्यूम अवशेषों को लगभग 70% डीजल, एलपीजी और नेफ्था जैसे डिस्टिलेट में बदल देगी।

  • परियोजना पूरी तरह चालू होने के बाद यह क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी।

  • युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

पचपदरा रिफाइनरी का महत्व

पचपदरा रिफाइनरी को राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा स्रोत माना जा रहा है। इसका निर्माण HPCL और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तहत हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • यह रिफाइनरी राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।

  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

  • पेट्रो-केमिकल उद्योग को गति मिलेगी।

  • राजस्थान को औद्योगिक निवेश का नया केंद्र बनने में मदद मिलेगी।

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