शोभना शर्मा। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और उन्नाव रेप केस से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों के बाद राजस्थान में कांग्रेस ने अपने चल रहे आंदोलनों को स्थगित करने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी ने जनता के हित में और पर्यावरण संरक्षण तथा न्याय की मांग को लेकर जो आंदोलन शुरू किए थे, सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों के बाद अब उन्हें फिलहाल रोका जा रहा है। डोटासरा ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन वापस लेना नहीं बल्कि स्थगित करना है और कांग्रेस भविष्य में भी जनभावनाओं के अनुरूप कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखती है।
अरावली बचाने के आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट से मिला समर्थन
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया। सड़क से लेकर जनसभाओं तक लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की और यह साफ संदेश दिया कि अरावली के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर 20 नवंबर के निर्णय पर रोक लगाकर यह साबित कर दिया है कि जनता की आवाज को गंभीरता से सुना गया है। डोटासरा ने उम्मीद जताई कि जनवरी में आने वाला सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला भी अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और जनभावनाओं के अनुरूप होगा। उनका कहना था कि अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की जल सुरक्षा, पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन रेखा है।
उन्नाव रेप केस पर फैसले से बढ़ा न्याय पर भरोसा
उन्नाव रेप केस में आरोपी कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी कांग्रेस ने संतोष जताया है। डोटासरा ने कहा कि इस निर्णय से आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतरी थी और देशभर में आंदोलन कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और गंभीर अपराधों में दोषियों को राहत नहीं दी जा सकती। डोटासरा ने जनता से अपील की कि वे सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा बनाए रखें। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जनभावनाओं के खिलाफ कोई निर्णय आता है, तो कांग्रेस संविधान के दायरे में रहते हुए अपना आंदोलन फिर से शुरू कर सकती है।
गहलोत ने फैसले को बताया स्वागत योग्य
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अरावली की परिभाषा को लेकर 20 नवंबर के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को स्वागत योग्य बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि अरावली को लेकर अगली शताब्दी तक की सोच के साथ नीतियां बनाई जाएं।
गहलोत ने पर्यावरण मंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें पर्यावरण के हित में काम करने की सोच रखनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरिस्का सहित पूरे अरावली क्षेत्र में खनन बढ़ाने की सोच भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
टीकाराम जूली का तीखा बयान
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने इसे जनता के सामूहिक संघर्ष और पर्यावरण की बड़ी जीत बताया। जूली ने कहा कि अरावली राजस्थान के मस्तक का तिलक है और यह प्रदेश की अस्मिता और सुरक्षा का कवच है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नाक के नीचे खनन माफिया अरावली को नुकसान पहुंचाने पर आमादा हैं। जूली ने कहा कि अलवर में ‘अरावली बचाओ जन-जागरण अभियान’ के तहत पैदल मार्च और संघर्ष शुरू हो चुका था और पूरे प्रदेश में लोग आक्रोश जता रहे थे। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले पर रोक लगाकर जनता की भावनाओं पर मुहर लगा दी।
संघर्ष जारी रखने की चेतावनी
टीकाराम जूली ने साफ शब्दों में कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं बल्कि मां के समान है और उसका सौदा करने वालों को राजस्थान की जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक अरावली पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित नहीं हो जाती। उन्होंने सरिस्का को अलवर का ताज बताते हुए कहा कि इसे हर कीमत पर बचाया जाएगा और इसके साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


