शोभना शर्मा। राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने एक बार फिर अपने पुराने उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया पर भरोसा जताया है। वहीं, टिकट की मांग ठुकराए जाने के बाद युवा नेता नरेश मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
कांग्रेस में टिकट को लेकर मचा घमासान
अंता सीट से कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। युवा नेता नरेश मीणा लगातार दावा कर रहे थे कि उन्हें इस बार पार्टी टिकट दे। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक अपनी बात पहुंचाई थी। लेकिन अंततः कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के वरिष्ठ और अशोक गहलोत के करीबी नेता प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह फैसला कांग्रेस संगठन में गहलोत गुट की पकड़ को और मजबूत करता हुआ दिखाई दे रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अशोक गहलोत ने खुद भाया के नाम पर अंतिम मुहर लगवाई।
नरेश मीणा की नाराजगी और निर्दलीय तैयारी
टिकट से वंचित होने के बाद नरेश मीणा ने खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि यदि कांग्रेस उन्हें टिकट नहीं देती, तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी परिस्थिति में बीजेपी से चुनाव नहीं लड़ेंगे। नरेश मीणा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने जनता के बीच पांच साल काम किया है। अंता की जनता मेरे साथ है। चाहे कांग्रेस टिकट दे या नहीं, मैं जनता के समर्थन से चुनाव लड़ूंगा।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे 14 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगे। इससे साफ है कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी का असर उपचुनाव में देखने को मिल सकता है।
कांग्रेस का भरोसा फिर प्रमोद जैन भाया पर क्यों?
प्रमोद जैन भाया अंता क्षेत्र में कांग्रेस का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे पांच बार इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2003 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे। 2008 और 2018 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। जबकि 2013 और 2023 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2023 में भाया को बीजेपी उम्मीदवार कंवरलाल मीणा ने पराजित किया था। बावजूद इसके, कांग्रेस आलाकमान ने भाया की पकड़ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से मौका देने का फैसला किया है। कांग्रेस का मानना है कि प्रमोद जैन भाया की छवि विकासवादी नेता की रही है और वे अंता क्षेत्र में कई योजनाओं के लिए जाने जाते हैं।
बीजेपी अभी तक उम्मीदवार तय नहीं कर सकी
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी तक अंता सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। पार्टी के भीतर इस सीट के लिए कई दावेदार हैं। 2023 में जीत दर्ज करने वाले कंवरलाल मीणा का नाम एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन बीजेपी इस बार किसी नए चेहरे को मौका दे सकती है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी रणनीतिक तौर पर कांग्रेस के भीतर मचे घमासान का फायदा उठाने की योजना बना रही है।
अंता सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
अंता विधानसभा सीट पर अब मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस की ओर से प्रमोद जैन भाया मैदान में हैं। नरेश मीणा निर्दलीय के रूप में अपनी साख पर लड़ने को तैयार हैं। बीजेपी जल्द अपने उम्मीदवार का ऐलान करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जहां निर्दलीय नरेश मीणा कांग्रेस और बीजेपी दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
अंता सीट का राजनीतिक इतिहास
अंता विधानसभा सीट पर अब तक पांच बार चुनाव हो चुके हैं, जिनका परिणाम इस प्रकार रहा है —
2003: प्रमोद जैन भाया (निर्दलीय)
2008: प्रमोद जैन भाया (कांग्रेस)
2013: डॉ. प्रभुलाल सैनी (बीजेपी)
2018: प्रमोद जैन भाया (कांग्रेस)
2023: कंवरलाल मीणा (बीजेपी)
इस इतिहास से स्पष्ट है कि अंता सीट पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों की स्थिति मजबूत रही है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
मतदान और परिणाम की तिथियां तय
चुनाव आयोग के अनुसार, अंता विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर 2025 को मतगणना की जाएगी। इस बीच सभी दलों ने प्रचार की तैयारी तेज कर दी है।
गहलोत और कांग्रेस नेतृत्व के लिए चुनौती
अंता उपचुनाव कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। यदि प्रमोद जैन भाया जीतते हैं, तो यह अशोक गहलोत की रणनीतिक सफलता मानी जाएगी। लेकिन यदि नरेश मीणा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर असंतोष का संकेत होगा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह चुनाव न केवल अंता क्षेत्र बल्कि पूरे हाड़ौती क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति का परीक्षण होगा।
अंता उपचुनाव 2025 का सियासी समीकरण अब बेहद दिलचस्प हो चुका है। कांग्रेस के भीतर गुटबाजी, बीजेपी की रणनीति और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नरेश मीणा की चुनौती—तीनों ही फैक्टर इस चुनाव को हाई-वोल्टेज मुकाबले में बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह उपचुनाव राजस्थान की राजनीति का प्रमुख आकर्षण बनने वाला है।


