अजमेर शहर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल का एक बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद का विषय बना हुआ है। हाल ही में दिए गए एक बयान में उन्होंने पाकिस्तान को भारत का “बड़ा भाई” कह दिया था, जिसके बाद इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अब इस विवाद पर प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने यू-टर्न लेते हुए वीडियो बयान जारी कर अपनी सफाई दी है।
वीडियो बयान जारी कर दी सफाई
मनोज बेहरवाल ने अपने वीडियो बयान में कहा कि उनके कथन को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह बात व्यंग्यात्मक रूप में कही थी, न कि किसी देश की श्रेष्ठता या तुलना के उद्देश्य से। उन्होंने कहा कि उनके बयान का आशय पूरी तरह अकादमिक और संदर्भित था, लेकिन उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
भारत को बताया सनातन राष्ट्र
अपने स्पष्टीकरण में बेहरवाल ने भारत को सनातन राष्ट्र बताते हुए कहा कि भारत का अस्तित्व प्रारंभ से ही रहा है, जबकि पाकिस्तान का गठन बाद में हुआ। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत एक प्राचीन सभ्यता है, जिसकी तुलना किसी भी नवगठित राष्ट्र से नहीं की जा सकती।
कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में दिया गया था बयान
बेहरवाल ने बताया कि 23 और 24 जनवरी को राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की एक कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई थी। इसी दौरान पुस्तकों और ऐतिहासिक संदर्भों पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पुस्तक के संदर्भ में यह बात कही थी कि पाकिस्तान भारत से कुछ घंटे पहले अस्तित्व में आया, जिसे उन्होंने व्यंग्य के तौर पर प्रस्तुत किया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “बड़ा होने” की बात प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक थी, न कि किसी देश को श्रेष्ठ या बड़ा साबित करने के लिए।
‘पूरी दुनिया जानती है भारत और पाकिस्तान की स्थिति’
मनोज बेहरवाल ने कहा कि आज पूरी दुनिया जानती है कि भारत वैश्विक मंच पर कहां खड़ा है और पाकिस्तान की स्थिति क्या है। ऐसे में इस विषय पर किसी तरह की तुलना या बहस की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भी दी प्रतिक्रिया
इस दौरान प्रिंसिपल बेहरवाल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि देश के निर्माण और विकास में नेहरू का योगदान अभूतपूर्व रहा है और उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
विवाद के बाद बढ़ी हलचल
बयान के सामने आने के बाद शिक्षण संस्थानों और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि अब प्रिंसिपल की सफाई के बाद मामला कुछ हद तक शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि बयान ने प्रदेश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


