पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति, धार्मिक विरासत और प्रदेश के सांस्कृतिक विकास पर विस्तृत रूप से अपनी बातें रखीं। उन्होंने कहा कि उपासक धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) युवाओं को सनातन के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं और उनके माध्यम से नई पीढ़ी में आध्यात्मिकता के प्रति नई चेतना जागृत हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में जब युवा आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, तब सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हजारों युवा धीरेंद्र शास्त्री को फॉलो करते हैं और उनकी प्रेरणा से भारतीय परंपराओं और सनातन धर्म को समझने का प्रयास कर रहे हैं। सीएम के अनुसार, यही वह शक्ति है जो आने वाली पीढ़ी को संस्कृति से जोड़कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी।
“पुष्कर की धरती राममय और हनुमानमय”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुष्कर की आध्यात्मिक महिमा का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में जहाँ भी कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पहुँचते हैं, वहाँ का वातावरण राममय और हनुमानमय हो जाता है। उन्होंने पुष्कर को अद्वितीय आस्था का केंद्र बताया और कहा कि यह वही स्थल है जहाँ ब्रह्मा की कृपा सदा बनी रहती है।
सीएम ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से भी पुष्कर अत्यंत विशेष स्थान है, क्योंकि यहां का आधा जल हिन्द महासागर और आधा अरब सागर में प्रवाहित होता है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा स्थान है जो दो सागरों को जोड़ने का कार्य करता है और ब्रह्माजी की भुजाओं की तरह भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा को एक दिशा देता है।
धार्मिक संरचनाओं के विकास के लिए बड़े निवेश की घोषणा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुष्कर के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पुष्कर की सुंदरता और आध्यात्मिक छटा को और निखारने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है।
उनके अनुसार, गिरिराज जी के विकास कार्यों के लिए 400 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया गया है और इसकी डीपीआर पर तेजी से काम जारी है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि संदीपन आश्रम से उज्जैन तक कृष्णगमन पथ के विकास का कार्य भी महत्वपूर्ण चरण में है।
सीएम ने यह भी कहा कि सरकार ने खाटूश्यामजी मंदिर, मेहंदीपुर बालाजी मंदिर समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए बजट आवंटित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, ताकि राजस्थान अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को और सुदृढ़ कर सके।
“राजस्थान शक्ति और भक्ति की धरती”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में धर्म का समावेश आवश्यक है, क्योंकि धर्म ही समाज में सद्भाव और संतुलन स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती है और “वसुधैव कुटुम्बकम” का भाव हमें विश्व में अनूठी पहचान देता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि राजस्थान की संस्कृति, शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है। यही कारण है कि यहां की जनता का आशीर्वाद और विश्वास हमेशा प्रदेश के विकास के पथ को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि राज्य की सरकार निरंतर संस्कृति, विचार और सनातन परंपरा को सशक्त बनाने के लिए कार्य कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा का आमंत्रण
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने जनता और श्रद्धालुओं से आगामी कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेता, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 28 फरवरी को अजमेर आ रहे हैं।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई है और उनके नेतृत्व में भारत ने अनेक गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे बड़ी संख्या में इस ऐतिहासिक सभा में सम्मिलित हों।


