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सीएम भजनलाल शर्मा ने की जेपी नड्डा से मुलाकात

सीएम भजनलाल शर्मा ने की जेपी नड्डा से मुलाकात

मनीषा शर्मा।  राजस्थान की सियासत में हलचल मच गई है, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार रात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई जब राज्य में कई सियासी मुद्दे गरमा रहे थे, और उपचुनावों के नजदीक आने से राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

सीएम भजनलाल की दिल्ली यात्रा

गुरुवार रात, सीएम भजनलाल शर्मा हरियाणा से सीधे दिल्ली पहुंचे और जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसके बाद वह जयपुर लौट आए। इस मुलाकात को राजनीतिक हलकों में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके पहले दिन जेपी नड्डा ने अपना राजस्थान दौरा रद्द कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, नड्डा और शर्मा की मुलाकात में राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालात और उपचुनावों पर गहन चर्चा हुई। ऐसा माना जा रहा है कि नड्डा ने शर्मा को इन परिस्थितियों में अपना फीडबैक दिया और उन्हें कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी दिए।

उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के विवाद

राजस्थान की राजनीति में हाल ही में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है—उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से जुड़ा विवाद। पिछले महीने उनके बेटे का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह एक महंगी कार चला रहे थे और पीछे पुलिस जीप उनकी सुरक्षा कर रही थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद, प्रेमचंद बैरवा को जनता और विपक्ष के निशाने पर आना पड़ा। उनकी सफाई में कहा गया कि उनका बेटा 18 साल का भी नहीं हुआ, लेकिन इस बयान को भी उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।

यह विवाद खत्म भी नहीं हुआ था कि कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट डाल दी जिसमें उन्होंने सिर्फ पांच शब्द लिखे—”बीजेपी, राजस्थान, दिल्ली, होटल, रशिया”। यह पोस्ट वायरल हो गई और इसमें निहित संदेश को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

किरोड़ी मीणा का विरोध

भजनलाल शर्मा के खिलाफ विपक्ष के अलावा उनके अपने दल के नेता भी सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में, राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा, जो पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा और फर्जी डॉक्टरों के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने एसआई परीक्षा रद्द करने की उनकी मांग को नजरअंदाज किया और मंत्रियों की एक कमेटी बना दी, जो उनके अनुसार पूरी तरह से बेअसर है।

किरोड़ी ने मीडिया से कहा, “मैं तीन बार मुख्यमंत्री से एसआई भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग कर चुका हूं। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया था, लेकिन अब एक कमेटी बैठा दी गई है, जो समझ से परे है।” किरोड़ी लगातार अपने इस्तीफे को स्वीकार करने की मांग भी कर रहे हैं, और इसे लेकर उन्होंने सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री पर दबाव भी बनाया है।

क्या बदलाव की संभावना है?

इस पूरी राजनीतिक हलचल के बीच, सीएम भजनलाल शर्मा ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम और विपक्ष के मुद्दों पर अपनी राय दी। भजनलाल ने नड्डा को यह भी बताया कि विपक्ष कुछ मुद्दों को बेवजह तूल दे रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वे उपचुनाव से पहले प्रदेश में किसी भी तरह के बड़े राजनीतिक बदलाव के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से यह आग्रह किया कि फिलहाल स्थिति को स्थिर रखा जाए। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि बीजेपी राजस्थान में अपने सियासी दांव-पेंचों को लेकर सावधानी बरत रही है और चुनावी रणनीति में कोई बड़ा परिवर्तन फिलहाल नहीं किया जाएगा।

उपचुनावों पर असर

राजस्थान में जल्द ही 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों से पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं। इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर इन चुनावों पर भी पड़ सकता है। जहां एक ओर प्रेमचंद बैरवा और किरोड़ी मीणा जैसे नेताओं के विवाद सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी का नेतृत्व उपचुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, भजनलाल शर्मा की राष्ट्रीय अध्यक्ष से हुई इस मुलाकात के बाद यह साफ है कि बीजेपी राजस्थान में अपने आंतरिक विवादों को हल करने की कोशिश कर रही है और उपचुनावों के मद्देनजर कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहती। इसका उद्देश्य पार्टी में एकजुटता बनाए रखना है, जिससे पार्टी को उपचुनावों में कोई नुकसान न हो।

राजस्थान की राजनीति इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। सीएम भजनलाल शर्मा और जेपी नड्डा की मुलाकात से यह स्पष्ट हो जाता है कि बीजेपी प्रदेश में किसी भी तरह की राजनीतिक अस्थिरता से बचने की कोशिश कर रही है। वहीं, प्रेमचंद बैरवा और किरोड़ी मीणा जैसे नेताओं की बयानबाजी पार्टी की छवि पर असर डाल सकती है। अब देखना यह है कि उपचुनावों में यह राजनीतिक घटनाक्रम किस तरह का मोड़ लेता है।

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