मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा राहत भरा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस वर्ष अतिवृष्टि (अत्यधिक वर्षा) से प्रभावित खरीफ फसलों के नुकसान को देखते हुए कृषि अनुदान वितरण को मंजूरी दी है। इस निर्णय से 6 जिलों के 8 लाख से अधिक किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभावित किसानों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से कृषि अनुदान वितरण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस कदम से उन किसानों को सहायता मिलेगी जिनकी फसलें हाल ही में आई बाढ़ और भारी वर्षा से पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गई थीं।
6 जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
राज्य सरकार के इस फैसले से अजमेर, अलवर, झुंझुनूं, कोटा, पाली और बांसवाड़ा जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
इन जिलों में लगभग 40 तहसीलों के 2,961 गांवों को अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद लिया गया।
सरकार के अनुसार, इन क्षेत्रों में खरीफ सीजन के दौरान हुई अतिवृष्टि और जलभराव से किसानों की फसलें 33 प्रतिशत से अधिक खराब हो गई थीं। इस कारण प्रभावित किसानों को कृषि इनपुट अनुदान के रूप में मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार ने 3,777 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया
राज्य सरकार ने एक नई अधिसूचना जारी करते हुए झालावाड़, धौलपुर, बूंदी, भरतपुर, डीग और टोंक जिलों की 43 तहसीलों के 3,777 गांवों को अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है।
इन गांवों में बाढ़ या अतिवृष्टि के कारण जिन किसानों की फसलें 33 प्रतिशत या उससे अधिक प्रभावित हुई हैं, उन्हें कृषि आदान-अनुदान वितरण की अनुमति दी गई है।
आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की उप शासन सचिव शैफाली कुशवाहा ने बताया कि यह निर्णय प्रभावित किसानों की स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इससे किसानों को अपनी आगामी फसलों के लिए आवश्यक कृषि इनपुट जैसे बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का संवेदनशील निर्णय
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अनुदान वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो, ताकि किसी भी पात्र किसान को सहायता से वंचित न रहना पड़े।
कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
राज्य सरकार के इस कदम से न केवल प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी।


