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सीएम भजनलाल का मंत्रियों को कड़ा संदेश: जनता से मिलें, कोताही नहीं चलेगी

सीएम भजनलाल का मंत्रियों को कड़ा संदेश: जनता से मिलें, कोताही नहीं चलेगी

मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सख्त रुख एक बार फिर सामने आया है। भाजपा विधायकों और मंत्रियों की अहम बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता, कार्यकर्ताओं और विधायकों से मिलने का समय निकालना प्रत्येक मंत्री की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनके पास जनता से मिलने और फीडबैक लेने का समय है, तो फिर मंत्रियों के व्यस्त होने का क्या कारण है। इस बयान ने सरकार के भीतर कार्यशैली को लेकर गंभीर संदेश दिया है।

लगातार शिकायतों के बाद बदला सीएम का अंदाज

पिछले कुछ महीनों से विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से यह शिकायत सामने आ रही थी कि कई मंत्री जनता की सुनवाई करने में उदासीन हैं। इन शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल ने बैठक में अपना रुख सख्त कर दिया।
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस बैठक में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल तथा मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग सहित पूरी मंत्री परिषद मौजूद रही। बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अब समस्याओं को सुनना ही नहीं, बल्कि उनका समाधान भी सुनिश्चित करना होगा।

जनता से जुड़ाव पहली जिम्मेदारी: सीएम शर्मा

सीएम भजनलाल ने बैठक में दो टूक कहा कि किसी भी मंत्री या जनप्रतिनिधि की पहली जिम्मेदारी जनता तक पहुंचना और उनके मुद्दों को समझना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने विकास के लिए सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों को बजट में समान रूप से पैसा दिया है। इसलिए अब यह दायित्व जनप्रतिनिधियों का है कि वे अपने क्षेत्रों में फील्ड विजिट करें और यह देखें कि सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंच रहा है या नहीं।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि वह खुद जनता से मिलते हैं, फील्ड में जाते हैं, विधायकों से बात करते हैं और समय पर काम करवाते हैं। ऐसे में यह समझ से परे है कि कुछ मंत्री इतने व्यस्त कैसे हो सकते हैं कि जनता और कार्यकर्ताओं के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे।

परफॉर्मेंस और जवाबदेही अब सबसे ऊपर

सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि अब मंत्री अपने प्रदर्शन के आधार पर ही आंके जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जनता की सुनवाई और फीडबैक को अब सर्वोच्च प्राथमिकता देनी ही होगी। जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में नियमित रूप से रहकर लोगों की समस्याओं को समझना होगा और उनके समाधान की दिशा में तेजी से काम करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं के परिणाम जमीन पर दिखें, यही सरकार और संगठन की प्राथमिकता है। आने वाले महीनों में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए भी यह आवश्यक है कि जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत हो और जनता को यह महसूस हो कि सरकार उनके लिए संवेदनशील और जवाबदेह है।

निकाय-पंचायत चुनावों के लिए मैदान तैयार करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि अब सभी मंत्रियों और विधायकों को नियमित जनसंवाद, प्रवास और फील्ड विजिट करने होंगे। साथ ही नए लोगों को संगठन से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
चूंकि अगले कुछ महीनों में निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं, इसलिए संगठन चाहता है कि सरकार की उपलब्धियां सीधे जनता तक पहुंचे और इनका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिले।

जमीन से जुड़े रहने पर जोर

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता तभी संभव है जब उसके मंत्री और जनप्रतिनिधि जमीन से जुड़े रहें। जनता की समस्याएं सुनें, समाधान करें और सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री या प्रतिनिधि जनता से दूर रहेगा, तो इसका नुकसान सरकार और संगठन दोनों को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में कोताही बरतने वाले मंत्रियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जनता के बीच सक्रियता दिखाना अब अनिवार्य होगा, न कि विकल्प।

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