मनीषा शर्मा। राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और आमजन के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में हब एवं स्पोक मॉडल की औपचारिक शुरुआत की। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को 100 से अधिक विशिष्ट जांचें नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे इलाज का खर्च कम होगा और समय पर जांच संभव हो सकेगी।
इस मॉडल के तहत प्रदेशभर में 400 स्पोक यूनिट और 11 मदर लैब्स को जोड़ा गया है। इन अत्याधुनिक लैब्स में ट्रोपोनिन, कैंसर मार्कर, बायोप्सी, थैलेसीमिया, हेपेटाइटिस, थायराइड सहित कई जटिल और महंगी जांचें मुफ्त की जाएंगी। अभी तक इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब्स का रुख करना पड़ता था, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता था। नई व्यवस्था से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के मरीजों को भी उन्नत जांच सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा जयपुर के आरयूएचएस चिकित्सालय में आयोजित राज्य स्तरीय आरोग्य शिविर और रक्तदान शिविर के दौरान की। इसी कार्यक्रम में उन्होंने ‘हील इन राजस्थान पॉलिसी, 2025’ का भी विमोचन किया। यह नीति राज्य में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, ताकि देश-विदेश के मरीजों को कम लागत में विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक कल्याण पर भी सरकार का विशेष फोकस दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से मुक्त करने के लिए एफसीएम इंजेक्शन अभियान की शुरुआत की। इसके अलावा स्कूली विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क चश्मा वितरण अभियान भी शुरू किया गया, जिससे बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्याओं का समय पर समाधान हो सके। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में चिकित्सा विभाग में 35 हजार पदों पर भर्ती की जा चुकी है, जबकि 15 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है।
हब एवं स्पोक मॉडल की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जिला अस्पतालों से लेकर तहसील स्तर तक की स्वास्थ्य इकाइयों को जोड़ा गया है। मरीजों के सैंपल कलेक्शन से लेकर जांच रिपोर्ट तैयार होने तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रखे जाएंगे, जिससे मरीजों को घर बैठे मोबाइल या अन्य माध्यम से रिपोर्ट मिल सकेगी। इससे अस्पतालों में भीड़ कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
इस योजना के लागू होने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध जांचों की संख्या 37 से बढ़कर 101 हो जाएगी, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह संख्या 15 से बढ़कर 66 तक पहुंच जाएगी।


