मनीषा शर्मा। राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना (Mukhyamantri Nishulk Dawa Yojana) के तहत सप्लाई की जा रही दवाइयों में लगातार खामियां सामने आ रही हैं। हाल ही में खांसी की सिरप पीने से बच्चों के बीमार होने और मौत के मामले ने जहां स्वास्थ्य विभाग को झकझोर कर रख दिया था, वहीं अब जयपुर के राजकीय जयपुरिया हॉस्पिटल में पेट साफ करने वाली दवा लैक्टुलोज सॉल्युशन (Lactulose Solution) में झिल्लीनुमा पदार्थ मिलने का नया मामला सामने आया है।
इस खामी का पता चलते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत दवा की सप्लाई रोक दी है और संबंधित बैच की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह दवा यूनीक्योर इंडिया लिमिटेड (Unicure India Limited) कंपनी द्वारा तैयार की गई थी।
जांच के आदेश, दो सदस्यीय कमेटी गठित
मामले के गंभीर स्वरूप को देखते हुए जयपुरिया हॉस्पिटल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है।
इस कमेटी में –
डॉ. विनोद गुप्ता, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना
डॉ. राजेन्द्र वर्मा, जनरल मेडिसिन विभाग, जयपुरिया हॉस्पिटल
को शामिल किया गया है।दोनों अधिकारी दवा के बैच की पूरी जांच करेंगे और यह पता लगाएंगे कि झिल्लीनुमा पदार्थ कैसे और किस प्रक्रिया में दवा में मिला। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि क्या इस दवा को बाजार और अस्पतालों से वापस लिया जाए या नहीं।दवा की शीशी में मिली झिल्लीनुमा परत
जानकारी के अनुसार, जयपुरिया हॉस्पिटल में लैक्टुलोज सॉल्युशन की नई खेप आने के बाद जब उसकी प्राथमिक जांच की गई, तो कर्मचारियों ने दवा की बोतल में कुछ अजीब देखा। जब बोतल को खोला गया और दवा को ढक्कन में डाला गया, तो उसमें झिल्लीनुमा परत (membrane-like substance) दिखाई दी।
यह देखते ही अस्पताल प्रशासन ने तुरंत दवा की सप्लाई रोक दी और इस दवा को मरीजों को देने पर रोक लगा दी गई। दवा के कुछ सैंपल को जांच के लिए राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला (State Drug Testing Laboratory) में भेजा गया है।
मरीजों को राहत, अब तक नहीं मिली कोई शिकायत
अस्पताल प्रशासन ने यह साफ किया है कि अब तक किसी भी मरीज को इस दवा के सेवन से किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या या प्रतिकूल प्रभाव (adverse effect) की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, सतर्कता बरतते हुए अस्पताल ने फैसला किया है कि जब तक लैब रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस दवा की सप्लाई पूरी तरह से स्थगित (suspended) रहेगी।
यूनीक्योर इंडिया लिमिटेड की बनी दवा
इस लैक्टुलोज सॉल्युशन की सप्लाई यूनीक्योर इंडिया लिमिटेड कंपनी द्वारा की गई थी, जो राजस्थान सरकार की फ्री मेडिसिन स्कीम के तहत विभिन्न दवाओं की आपूर्ति करती है। मेडिकल सूत्रों के अनुसार, दवा की क्वालिटी और सेफ्टी की जांच के लिए कंपनी से भी जवाब मांगा गया है। अगर जांच में उत्पादन प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही साबित होती है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
निशुल्क दवा योजना में लगातार उठ रहे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत सप्लाई हो रही दवाइयों पर सवाल उठे हों। हाल ही में कई जिलों से दवाओं की क्वालिटी और सेफ्टी को लेकर शिकायतें आई थीं। खांसी की सिरप पीने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने और कुछ मौतों की घटनाओं के बाद अब यह नया मामला सरकार की फ्री मेडिसिन स्कीम (Free Medicine Scheme Rajasthan) पर सवाल खड़े कर रहा है। राज्य सरकार ने इस योजना को गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया था। लेकिन बार-बार खराब दवा मिलने से आमजन में डर और अविश्वास बढ़ रहा है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि यह साबित होता है कि दवा में कंटैमिनेशन (Contamination) है या उत्पादन प्रक्रिया में कमी रही है, तो सप्लायर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, दवा की शेष खेप को भी रीकॉल (Recall) करने के निर्देश दिए जाएंगे। राज्य औषधि नियंत्रण संगठन (Drug Control Organization Rajasthan) इस पर नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी जिम्मेदारी
राज्य में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत हर महीने लाखों मरीजों को मुफ्त दवाइयां दी जाती हैं। इन दवाओं की क्वालिटी पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) के लिए हर बैच की जांच जरूरी है। लेकिन कई बार जल्दबाजी में सप्लाई के दौरान टेस्टिंग प्रक्रिया अधूरी रह जाती है, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।
क्या है लैक्टुलोज सॉल्युशन?
लैक्टुलोज (Lactulose) एक सामान्य दवा है, जिसका उपयोग कब्ज (Constipation) के इलाज में किया जाता है। यह आंतों में पानी की मात्रा बढ़ाकर मल को नरम करती है और मल त्याग को आसान बनाती है। आमतौर पर यह दवा सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन अगर इसमें किसी तरह का बाहरी पदार्थ या संक्रमण मिला हो तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।
आमजन में चिंता, सरकार से जवाब की उम्मीद
जयपुरिया हॉस्पिटल में इस घटना के बाद आमजन में चिंता बढ़ गई है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में भी दवाओं की क्वालिटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो गरीबों का इलाज कैसे सुरक्षित रहेगा। लोग अब स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाहियां दोबारा न हों।


