मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका) में नियुक्त सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि सफाई कर्मचारी अपने मूल कार्य यानी सफाई करने के बजाय दफ्तरों में हाजिरी लगाकर क्लर्क, बाबू या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का काम कर रहे हैं। कई कर्मचारी तो नेताओं और अधिकारियों के निजी सहायक तक बन बैठे हैं। इस कारण शहरों में सफाई व्यवस्था चरमराने लगी है। अब सरकार ने इस पर रोक लगाने के लिए नया आदेश जारी किया है।
सफाई कर्मचारियों पर सख्त निगरानी
स्वायत्त शासन निदेशालय ने सभी नगरीय निकायों के अधिशाषी अधिकारियों और आयुक्तों को निर्देश जारी किए हैं कि सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति एरिया वाइज गूगल शीट पर दर्ज करके हर माह निदेशालय को भेजी जाए। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि कौन कर्मचारी अपने मूल कार्य पर है और कौन दफ्तरों में हाजिरी लगाकर बैठा हुआ है।
21 हजार पदों पर हुई थी सीधी भर्ती
साल 2018 में प्रदेशभर में 21 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारियों की सीधी भर्ती की गई थी। इसमें किसी लिखित परीक्षा के बजाय कैटेगरी वाइज लॉटरी सिस्टम अपनाया गया। चयनित अभ्यर्थियों को सीधा नियुक्ति पत्र दिया गया। सरकार का उद्देश्य था कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं में सफाई व्यवस्था बेहतर हो। लेकिन वास्तविकता इससे अलग निकली। आज बड़ी संख्या में वही कर्मचारी दफ्तरों में बैठे हैं और सफाई का काम कॉन्ट्रैक्ट पर लगे मजदूरों से करवाया जा रहा है। ऐसे में नगर निकायों की आय बढ़ने के बावजूद सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
दफ्तरों और नेताओं के यहां तैनात कर्मचारी
शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कई सफाई कर्मचारी नगर निकाय दफ्तरों में बाबू, जूनियर असिस्टेंट और अन्य क्लेरिकल कार्य करने लगे हैं। कुछ कर्मचारी तो विधायकों, मंत्रियों और नेताओं के निजी सहायक के रूप में तैनात हैं। इस वजह से शहरों में सफाई के लिए कर्मचारियों की भारी कमी महसूस हो रही है।
एरिया वाइज उपस्थिति शीट अनिवार्य
निदेशालय ने अब आदेश दिया है कि हर कर्मचारी की उपस्थिति और काम का एरिया तय होना चाहिए। हर माह उसकी रिपोर्ट गूगल शीट के माध्यम से निदेशालय तक भेजी जाए। यह आदेश इसलिए दिया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट रहे और वह अपने मूल कार्य से बच न सके।
दूसरे विभागों में तैनात कर्मचारियों को बुलाने के आदेश
कई कर्मचारी नगर निकायों से हटकर कलेक्ट्रेट या अन्य सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं। अब इन सभी कर्मचारियों को वापस बुलाकर सफाई कार्य में लगाया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी सफाई करने से इंकार करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
सफाई व्यवस्था पर असर
सफाई कर्मचारियों के मूल काम से हटने के कारण प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी है। मजबूर होकर नगर निकायों को कॉन्ट्रैक्ट पर सफाईकर्मी रखने पड़ रहे हैं। इससे न केवल अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है बल्कि स्थायी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी पूरी नहीं हो रही हैं।
सरकार का सख्त रुख
स्वायत्त शासन विभाग ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी कर्मचारी को अपने मूल काम से बचने नहीं दिया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी दफ्तर में बैठकर सफाई कार्य से बचता है, तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता को मिलेगी राहत
सरकार का यह कदम सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अहम माना जा रहा है। यदि सफाई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं तो शहरों में स्वच्छता व्यवस्था सुधरेगी। यह कदम न केवल निकायों का बोझ कम करेगा, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट पर सफाईकर्मियों की नियुक्ति की आवश्यकता भी घटेगी।


