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जयपुर में UGC नियमों को लेकर बवाल: करणी सेना और पुलिस में भिड़ंत, 11 फरवरी को विधानसभा घेराव का अल्टीमेटम

जयपुर में UGC नियमों को लेकर बवाल: करणी सेना और पुलिस में भिड़ंत, 11 फरवरी को विधानसभा घेराव का अल्टीमेटम

जयपुर शुक्रवार को तब तनावपूर्ण हो उठा जब यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन के दौरान करणी सेना और सवर्ण समाज के अन्य संगठनों की पुलिस के साथ तीखी झड़प हो गई। राजधानी में शहीद स्मारक पर आयोजित इस सभा में हजारों लोग जुटे थे, जहां माहौल शुरू से ही उग्र नजर आ रहा था। प्रदर्शनकारियों ने मंच से अचानक मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच की घोषणा कर दी, जिसके बाद हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे।

भीड़ के आगे बढ़ते ही पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई लेयर की बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद धक्का-मुक्की और नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को पीछे धकेला और उन्हें आगे बढ़ने से रोका। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की अनहोनी न हो सके।

सवर्ण संगठनों और करणी सेना ने मंच से स्पष्ट घोषणा की कि अगर केंद्र सरकार यूजीसी के नए नियम वापस नहीं लेती, तो आंदोलन और उग्र होगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह नया कानून उनके अधिकारों का हनन है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला केवल अस्थायी राहत है, स्थायी समाधान तभी होगा जब केंद्र सरकार नया कानून पूरी तरह वापस ले।

सभा के दौरान सवर्ण संगठनों ने एक बड़ा राजनीतिक निर्णय भी लिया। उन्होंने कहा कि आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जाएगी। करणी सेना और अन्य संगठन भाजपा के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे और पार्टी का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। यह घोषणा राज्य की राजनीति के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि सवर्ण संगठनों का प्रभाव कई क्षेत्रों में निर्णायक माना जाता है।

उधर, आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि 11 फरवरी के बाद किसी भी दिन प्रदेश भर से हजारों लोग जयपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, और यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।

जयपुर में हुई यह झड़प और राजनीतिक बहिष्कार की घोषणा ने राज्य की सियासत को गर्मा दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार स्थिति को सामान्य करने के लिए क्या कदम उठाती है और आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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