मनीषा शर्मा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा में लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। हर साल इस योजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद कई राज्यों से गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने मनरेगा में बड़े बदलाव किए जाने का दावा किया है। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि नई व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिससे योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी और जरूरतमंद मजदूरों को वास्तविक लाभ मिलेगा।
जोधपुर में मीडिया से बोले केंद्रीय मंत्री
रविवार को जोधपुर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मनरेगा को लेकर सरकार का पक्ष विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि मनरेगा पर हर साल भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने योजना की कार्यप्रणाली में अहम बदलाव किए हैं।
अब 100 की जगह 125 दिन मिलेगा रोजगार
गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब मजदूरों को 100 दिन की जगह 125 दिन तक रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को अधिक काम मिलेगा और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। मंत्री के अनुसार सरकार का उद्देश्य केवल आंकड़ों में रोजगार दिखाना नहीं, बल्कि वास्तव में मजदूरों को काम और आर्थिक सुरक्षा देना है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी देना है और नए बदलाव इसी सोच को मजबूत करने के लिए किए गए हैं।
सरपंच और अधिकारियों पर गंभीर आरोप
केंद्रीय मंत्री ने मनरेगा में भ्रष्टाचार के तरीकों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर सरपंच और सरकारी अधिकारी मिलकर मजदूरों के जॉब कार्ड अपने पास रख लेते थे। इसके जरिए मजदूरों की जानकारी के बिना फर्जी हाजिरी भर दी जाती थी और भुगतान उठा लिया जाता था। उन्होंने कहा कि एक ही काम को कई बार कागजों में दिखाकर पैसे निकाले जाते थे। कई मामलों में बिना काम किए ही भुगतान कर दिया जाता था। इन गड़बड़ियों के कारण सरकार के पास मनरेगा से जुड़ी 11 लाख से ज्यादा शिकायतें पहुंची थीं।
‘दुधारू गाय’ बना दी गई थी योजना
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कुछ राज्यों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मनरेगा को दुधारू गाय की तरह बना दिया गया था। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने इस योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। कई जगहों पर सिर्फ कागजों में ही काम चलता था, जबकि जमीनी स्तर पर मजदूरों को वास्तविक रोजगार नहीं मिल पाता था। मंत्री के अनुसार सरकार के पास आई शिकायतों से यह साफ हो गया था कि अगर व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया, तो योजना का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
रोजगार की गारंटी को मजबूत करने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा एक ऐसी योजना है, जिसमें मजदूर को रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों के समय कई जगहों पर मजदूरों को पार्टी की विचारधारा के आधार पर काम दिया जाता था। इससे जरूरतमंद लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ता था। शेखावत ने दावा किया कि नए बदलावों के बाद ऐसी भेदभावपूर्ण व्यवस्था पर रोक लगेगी और मजदूरों को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलेगा। उनका कहना था कि तकनीक और निगरानी तंत्र को मजबूत कर भ्रष्टाचार को रोका जाएगा।
प्रशासनिक खर्चों के लिए अलग प्रावधान
मनरेगा में किए गए बदलावों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक खर्चों के लिए करीब 13 हजार करोड़ रुपए नियोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे योजना के संचालन, निगरानी और पारदर्शिता को बेहतर बनाया जा सकेगा। मंत्री के अनुसार मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के बिना किसी भी बड़ी योजना को सफल नहीं बनाया जा सकता। इसलिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी तरह की कमी न रहे।
नाम बदलने पर विपक्ष के विरोध का जवाब
मनरेगा योजना के नाम को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर भी गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नाम से ज्यादा जरूरी है योजना की मंशा और उसका सही क्रियान्वयन। अगर योजना सही तरीके से लागू होगी और उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा, तो नाम को लेकर विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे।
ग्रामीण रोजगार नीति पर केंद्र का फोकस
केंद्रीय मंत्री के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार नीति को लेकर गंभीर है और मनरेगा को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। 125 दिन रोजगार का प्रावधान, प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार पर सख्ती के दावे के साथ सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि मनरेगा को फिर से उसके मूल उद्देश्य की ओर ले जाया जाएगा।


