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ब्यावर में 3 महीने से लापता नाबालिग के लिए शहर बंद

ब्यावर में 3 महीने से लापता नाबालिग के लिए शहर बंद

शोभना शर्मा। राजस्थान के ब्यावर शहर में तीन महीने से लापता नाबालिग बालिका का कोई सुराग नहीं लगने से जनाक्रोश चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को सकल जैन समाज के आह्वान पर पूरा शहर बंद रहा। व्यापारिक संगठनों और विभिन्न समाजों ने इस बंद का समर्थन किया। सुबह से ही दुकानों के शटर बंद रहे, बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और फल-सब्जी के ठेले तक नहीं लगे। यह आंदोलन पुलिस की कथित लापरवाही और धीमी कार्रवाई के खिलाफ जनता का आक्रोश साफ तौर पर दिखा रहा है।

तीन महीने से लापता, परिवार की गुहार

ब्यावर के लोकाशाह नगर की यह घटना है, जहां जैन समाज की एक नाबालिग लड़की तीन महीने पहले अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने तुरंत पुलिस को शिकायत दी थी और प्रशासन से गुहार लगाई थी कि बालिका को सुरक्षित ढूंढा जाए। लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। परिजन और समाज का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे बालिका की बरामदगी अब तक नहीं हो पाई।

पूर्ण रूप से सफल रहा शहर बंद

जैन समाज ने इस मुद्दे पर एक संघर्ष समिति का गठन किया और ‘शहर बंद’ का आह्वान किया। इस आह्वान को शहर के सभी सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया। शनिवार को सुबह से ही शहर की दुकानें, प्रतिष्ठान, स्कूल और यहां तक कि सब्जी-फल की रेहड़ियां भी बंद रहीं। मुख्य बाजारों में बंद समर्थकों ने पैदल और बाइक रैली निकालकर लोगों से जुड़ने की अपील की। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए कार्यकर्ता प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।

आंदोलन हुआ तेज, प्रशासन पर दबाव

बंद के दौरान जैन समाज और युवा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर पुलिस ने शुरुआत से ही सख्ती दिखाई होती तो बालिका का पता अब तक चल जाता। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और भी बड़ा और उग्र होगा।

विशाल जुलूस और ज्ञापन सौंपा गया

शहर बंद के समापन पर चांग गेट से एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। यह जुलूस जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ब्यावर पुलिस की लचर कार्रवाई, जांच में देरी और बालिका को बरामद करने में विफलता पर सवाल उठाए गए।

सीएम से सीधे करेंगे मुलाकात

संघर्ष समिति के सदस्य एडवोकेट महेंद्र बोहरा ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ एक नाबालिग बेटी को न्याय दिलाना है। यह शहर बंद इसी संदेश को साफ तौर पर देता है कि समाज अब चुप नहीं बैठेगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अगले दौरे के दौरान उनसे सीधे मुलाकात कर संबंधित अधिकारियों के ट्रांसफर की मांग की जाएगी।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

अब तक पुलिस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि दबाव बढ़ने के बाद अधिकारियों ने जांच को तेज करने का आश्वासन दिया है। लेकिन परिजनों और समाज का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, जब तक बालिका सुरक्षित वापस नहीं मिल जाती।

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