राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के तहत अब प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को पारंपरिक मार्कशीट की जगह होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड दिए जाएंगे। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान उनके समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। परिषद की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि यह नया प्रोग्रेस कार्ड बच्चों की सीखने की क्षमता, गतिविधियों में भागीदारी, व्यवहार, सामाजिक कौशल और व्यक्तिगत विकास को भी दर्शाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में रटंत शिक्षा की बजाय समझ, रचनात्मकता और व्यवहारिक कौशल को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा प्रणाली को अधिक समग्र और कौशल आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में राजस्थान में भी यह नई पहल शुरू की जा रही है। इस नीति के अनुसार बच्चों का आकलन केवल लिखित परीक्षा के अंकों से नहीं बल्कि उनकी गतिविधियों, सहभागिता और सीखने की प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड इसी अवधारणा पर आधारित है। इसमें विद्यार्थी के पूरे वर्ष के प्रदर्शन को दर्ज किया जाएगा। इससे शिक्षक और अभिभावक दोनों को यह समझने में मदद मिलेगी कि बच्चे की वास्तविक क्षमता क्या है और किन क्षेत्रों में उसे सुधार की जरूरत है।
कक्षा 1 से 4 तक लागू होगी नई व्यवस्था
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अंत में इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों का समग्र मूल्यांकन किया जाएगा। कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों को सीधे होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं कक्षा 3 और 4 के विद्यार्थियों के लिए प्रिंटिंग के माध्यम से सीबीए रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे। यह रिपोर्ट कार्ड पहले के पारंपरिक रिपोर्ट कार्ड से बिल्कुल अलग होंगे। इसमें विद्यार्थियों की कक्षा में भागीदारी, गतिविधियों में रुचि, अनुशासन, सहयोग की भावना और सामाजिक व्यवहार जैसे पहलुओं को भी दर्ज किया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि बच्चा केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी किस प्रकार प्रगति कर रहा है।
पूरे सत्र की गतिविधियों के आधार पर होगा आकलन
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों का मूल्यांकन पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान उनकी गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। शिक्षक नियमित रूप से बच्चों की प्रगति का अवलोकन करेंगे और उसी आधार पर प्रोग्रेस कार्ड तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना और उन्हें केवल परीक्षा के दबाव से मुक्त करना है। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड में बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी रचनात्मकता, संवाद कौशल, सहयोग की भावना और सामाजिक व्यवहार को भी महत्व दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
जिलों को जारी की गई वित्तीय स्वीकृति
इस नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी है। परिषद के उपायुक्त (द्वितीय) संतोष कुमार मीणा की ओर से सभी जिलों के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयकों को इस संबंध में निर्देश भेजे गए हैं। परिषद ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड की तैयारी और वितरण के लिए प्रति विद्यार्थी पांच रुपये की दर से राशि स्वीकृत की है। यह राशि जल्द ही जिलों को हस्तांतरित की जाएगी ताकि नए रिपोर्ट कार्ड की छपाई और वितरण की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में अहम कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बच्चों की वास्तविक सीखने की प्रक्रिया को समझने में काफी मददगार साबित हो सकती है। इससे शिक्षकों को भी विद्यार्थियों की कमजोरियों और क्षमताओं को बेहतर तरीके से पहचानने का अवसर मिलेगा। नई प्रणाली के लागू होने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


