शनिवार को वर्किंग डे घोषित किए जाने के बाद जैसे ही कॉज लिस्ट सामने आई, हाईकोर्ट में वकीलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वकीलों का कहना है कि बिना उनकी सहमति और आपत्तियों को ध्यान में रखे प्रशासन अपने फैसले पर कायम है। इसी के चलते हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को इस निर्णय के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने तत्काल एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक बुलाई, जिसमें शनिवार को कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया। वकीलों का कहना है कि शनिवार को अदालत खोलने से उनकी कार्यप्रणाली और पेशेवर संतुलन पर असर पड़ेगा।
पहले भी हो चुका है स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर वकीलों ने विरोध जताया हो। साल की शुरुआत में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर पीठ के वकीलों के साथ-साथ बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने भी इस निर्णय के खिलाफ एक दिन का स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार किया था। उस समय वकीलों ने साफ तौर पर कहा था कि शनिवार को नियमित कार्यदिवस बनाने से पहले उनकी राय लेना जरूरी था।
पांच जजों की कमेटी का गठन
वकीलों के बढ़ते विरोध को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इस पूरे मामले पर विचार के लिए पांच जजों की एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को निर्देश दिए गए थे कि वह शनिवार को अदालत खोलने के निर्णय के सभी पहलुओं पर विचार कर अपनी रिपोर्ट 21 जनवरी तक सौंपे। वकीलों को उम्मीद थी कि कमेटी की रिपोर्ट के बाद इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई रिपोर्ट
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने बताया कि पांच जजों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी है। हालांकि, इस रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की गई हैं, इसकी जानकारी बार एसोसिएशन को नहीं दी गई। अब जब शनिवार की कॉज लिस्ट जारी कर दी गई है, तो यह स्पष्ट हो गया है कि हाईकोर्ट प्रशासन अपने पहले लिए गए निर्णय पर कायम है और शनिवार को न्यायिक कार्य कराने के मूड में है।
फुल कोर्ट बैठक में लिया गया था फैसला
दरअसल, 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि जनवरी 2026 से हर महीने हाईकोर्ट के दो शनिवार कार्यदिवस होंगे। इस व्यवस्था के तहत पूरे साल में 24 अतिरिक्त कार्यदिवस मिलेंगे। अदालत प्रशासन का मानना है कि इससे न्यायिक कार्यों की गति बढ़ेगी और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।
लंबित मामलों के दबाव से लिया गया निर्णय
फुल कोर्ट बैठक में यह भी स्वीकार किया गया था कि हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मौजूदा कार्यदिवसों में सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में न्यायिक समय का विस्तार आवश्यक हो गया है। प्रशासन के अनुसार, महीने में दो शनिवार अदालत खुलने से न केवल लंबित मामलों की संख्या कम होगी, बल्कि सुनवाई प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज बनेगी। इससे आम लोगों को भी समय पर न्याय मिलने की उम्मीद है।
वकीलों की आपत्तियां बनीं चुनौती
हालांकि, वकीलों का तर्क है कि शनिवार को कार्यदिवस घोषित करना उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन पर असर डालेगा। उनका कहना है कि बिना बार की सहमति के ऐसा फैसला लागू करना उचित नहीं है। यही वजह है कि अब कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
आगे और बढ़ सकता है विवाद
शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के बाद वकीलों और हाईकोर्ट प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। जहां प्रशासन लंबित मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता बता रहा है, वहीं वकील अपने अधिकारों और कार्य व्यवस्था को लेकर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


