शोभना शर्मा। डूंगरपुर जिले में सोमवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत और उदयपुर से सांसद मन्नालाल रावत के बीच तीखी बहस हो गई। जिला परिषद सभागार में आयोजित इस बैठक में दोनों सांसदों के बीच नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण हो गया और बैठक की कार्यवाही प्रभावित हुई।
दिशा समिति की बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करना होता है, लेकिन इस बैठक में विकास कार्यों की चर्चा के बजाय एजेंडे और चर्चा के अधिकार को लेकर विवाद छा गया।
एजेंडे को लेकर शुरू हुआ विवाद
बैठक के दौरान सांसद राजकुमार रोत ने अध्यक्ष की अनुमति से अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा कराने की बात कही। उनका कहना था कि जिले से जुड़े अहम मुद्दों और जनहित से संबंधित मामलों को बैठक में उठाया जाना चाहिए, ताकि प्रशासन को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके। वहीं सांसद मन्नालाल रावत ने इसका विरोध किया और दिशा समिति की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि बैठक केवल केंद्र सरकार की अधिसूचित योजनाओं तक सीमित रहनी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना था कि दिशा समिति का दायरा तय है और बैठक को निर्धारित एजेंडे से बाहर नहीं ले जाया जा सकता।
मुख्यमंत्री बीमा योजना पर बढ़ा टकराव
विवाद उस समय और गहरा गया जब मुख्यमंत्री बीमा योजना से जुड़े मुद्दे पर चर्चा का प्रयास किया गया। सांसद मन्नालाल रावत ने इस विषय को दिशा समिति की बैठक के दायरे से बाहर बताते हुए आपत्ति जताई। इस पर सांसद राजकुमार रोत ने कथित घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी योजना में अनियमितताएं सामने आ रही हैं तो उस पर चर्चा करना जरूरी है। राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की अनुमति से अन्य विषयों पर भी चर्चा संभव है और जिला प्रशासन को जिले की वास्तविक प्रगति की जानकारी बैठक में देनी चाहिए।
‘तय एजेंडे से बाहर नहीं हो सकती बैठक’
सांसद मन्नालाल रावत ने दिशा समिति की गाइडलाइन दिखाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि बैठक केवल तय एजेंडे के अनुसार ही संचालित की जा सकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समिति की बैठक में केवल केंद्र सरकार की योजनाओं पर चर्चा और उसी के अनुरूप कार्यवाही दर्ज की जानी चाहिए। रावत का कहना था कि अगर बैठक को एजेंडे से बाहर ले जाया जाएगा तो उसकी वैधानिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिशा समिति का उद्देश्य राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि योजनाओं की निगरानी और समीक्षा करना है।
आरोप-प्रत्यारोप से बिगड़ा माहौल
इस दौरान दोनों सांसदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। बहस इतनी तीखी हो गई कि दोनों सांसद अपनी सीट से खड़े होकर तेज आवाज में एक-दूसरे पर सवाल उठाने लगे। शब्दों का चयन भी सख्त होता चला गया, जिससे सभागार में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में असहजता फैल गई। इसी बीच बाप विधायक द्वारा की गई एक टिप्पणी ने माहौल को और अधिक गरमा दिया। इस टिप्पणी पर सांसद मन्नालाल रावत ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे विवाद और बढ़ गया।
सुरक्षाकर्मियों को करना पड़ा हस्तक्षेप
स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को बीच में आना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों ने दोनों सांसदों को शांत कराने का प्रयास किया ताकि बैठक में किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। कुछ समय के लिए बैठक की कार्यवाही भी प्रभावित हुई और माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
प्रशासन की भूमिका और बैठक के बाद की चर्चा
पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह सांसदों को समझाने का प्रयास करते रहे। हालांकि, अधिकांश अधिकारी मौन रहकर स्थिति को देखते रहे और किसी भी पक्ष में खुलकर बोलने से बचते नजर आए। बैठक समाप्त होने के बाद भी सांसदों के बीच हुई इस तीखी नोकझोंक की चर्चा प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में होती रही। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में इसका असर जिले की राजनीति और प्रशासनिक समन्वय पर भी पड़ सकता है।


