मनीषा शर्मा। अंता विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने राजस्थान की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज करते हुए अपने उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया को भारी अंतर से विजयी बनाया। कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा के मोरपाल सुमन को करीब 15 हजार से अधिक वोटों से हराया। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव परिणाम सामने आते ही नरेश मीणा के समर्थक अचानक आक्रोशित हो उठे और माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीड़ बढ़ने पर पुलिस प्रशासन को तत्काल सुरक्षा बढ़ानी पड़ी और पूरा क्षेत्र अलर्ट मोड पर आ गया।
17वें राउंड की काउंटिंग पूरी होते ही नरेश मीणा अपने समर्थकों के बीच पहुंचे। इस दौरान वे साफ तौर पर निराश दिखाई दिए। जैसे ही लोगों को उनके आने की जानकारी मिली, हजारों की संख्या में समर्थक वहां इकट्ठा हो गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। भीड़ के लगातार बढ़ते रुख और बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाकर हालात पर नियंत्रण का प्रयास किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
नारेबाजी के बीच नरेश मीणा अपनी कार के ऊपर चढ़ गए और समर्थकों को संबोधित करने लगे। उन्होंने शांतिपूर्वक अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन समर्थक हार से बेहद नाराज थे और नारेबाजी लगातार जारी रही। माहौल में मौजूद गुस्सा इस बात का संकेत था कि मीणा समर्थकों ने हार को स्वीकारना मुश्किल माना। इस बीच पुलिस बल ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया ताकि स्थिति और न बिगड़े।
हार पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेश मीणा ने कहा कि वे जनता के आशीर्वाद के सामने सिर झुकाते हैं। उन्होंने माना कि जनता ने उन्हें जो प्यार दिया, वह उनके लिए सम्मान की बात है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह चुनाव भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई का हिस्सा था, लेकिन “ईमानदारी हार गई।” उन्होंने आगे कहा कि शायद उनकी तपस्या और त्याग में कोई कमी रह गई होगी और भगवान उनकी परीक्षा ले रहा है। उनके भावुक बयान के दौरान भी समर्थकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और नारेबाजी लगातार जारी रही।
चुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया ने 69,462 वोट हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। भाजपा के मोरपाल सुमन को 53,868 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने 53,740 वोट पाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। बेहद मामूली अंतर से तीसरे स्थान पर रह जाने के बाद उनके समर्थकों में रोष स्पष्ट रूप से देखने को मिला।


