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चंबल नदी खतरे के निशान पर, पार्वती बांध से पानी छोड़ा

चंबल नदी खतरे के निशान पर, पार्वती बांध से पानी छोड़ा

मनीषा शर्मा । राजस्थान में मानसून इस बार तबाही लेकर आया है। पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों की हालत बिगाड़ दी है। सबसे ज्यादा असर हाड़ौती और पूर्वी राजस्थान के इलाकों में देखने को मिल रहा है। चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और हालात बिगड़ने के चलते प्रशासन ने पार्वती बांध के चार गेट खोल दिए हैं। अचानक पानी छोड़े जाने से नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे आसपास के गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।

मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 29 अगस्त तक प्रदेश में भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। शनिवार को बूंदी जिले के नैनवा क्षेत्र में 500 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। वहीं कोटा जिले के डिगोड़ में 270 मिमी और बारां जिले के अन्ता व बारां शहर में 240-240 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। टोंक, करौली, जयपुर और बूंदी में भी झमाझम बरसात ने हालात को और गंभीर कर दिया है। हालांकि धौलपुर जिले में बारिश कम हुई है, लेकिन चंबल नदी में लगातार बढ़ रहे पानी ने वहां प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

पार्वती बांध का जलस्तर 223.20 मीटर तक पहुंच गया था। बांध पर दबाव कम करने और पानी की भारी आवक को देखते हुए चार गेट खोल दिए गए। सहायक अभियंता पपेन्द्र मीणा ने बताया कि शनिवार शाम करीब 4500 क्यूसेक पानी बांध से छोड़ा गया। पानी छोड़े जाने के बाद सैपऊ- बाड़ी रपट मार्ग, मालोनी खुर्द रपट मार्ग, सखवारा रपट मार्ग और ठेकुली रपट मार्ग पर पानी की मोटी चादर बहने लगी। नतीजतन, पुलिस और प्रशासन ने इन रास्तों पर वाहनों और राहगीरों का आना-जाना बंद कर दिया है।

करौली और डांग क्षेत्र से पार्वती बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार पानी की आवक बनी हुई है। अनुमान है कि राजाखेड़ा क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गांव चंबल नदी की बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी और नालों के आसपास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। करीब 20 दिन पहले भी इसी तरह की स्थिति बनी थी, जब सेना को राहत और बचाव कार्य के लिए बुलाना पड़ा था।

गंगापुर सिटी और आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। लगातार हो रही बारिश से बाटोदा, तलवाड़ा और बरनाला कस्बों में कई कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। सवाई माधोपुर से गंगापुर सिटी जाने वाला स्टेट हाइवे पूरी तरह बंद हो गया है। पिछले 24 घंटों में गंगापुर सिटी में 38 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई जगह गाड़ियां पानी में फंस गईं और पैदल राहगीरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बटोदा कस्बे में स्थिति और गंभीर है। यहां कॉलोनियों में पानी भर जाने से लोगों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। जब तहसीलदार मौके पर पहुंचे, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और खरी-खोटी सुनाई। इतना ही नहीं, लोगों ने उन्हें गाड़ी से खींचकर बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार बारिश होने के बावजूद प्रशासन ने जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की। कस्बे में मौजूद एकमात्र नाला भी सफाई न होने से बंद पड़ा है, जिससे पानी की निकासी रुक गई और घरों में पानी घुस गया।

धौलपुर जिले में फिलहाल बारिश का असर कम है, लेकिन चंबल नदी का उफान खतरे का संकेत दे रहा है। जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। पुलिस व स्थानीय प्रशासन की टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

राजस्थान में मानसून की इस मार ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियां और मजबूत करने की जरूरत है। जहां एक तरफ नदी और बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जल निकासी की व्यवस्था कमजोर साबित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव और सड़कें बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

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