राजस्थान के मांढण तहसील के ग्राम काठूवास में शुक्रवार को उस समय गहरा शोक फैल गया, जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की बड़ी मां चलती देवी का 91 वर्ष की उम्र में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया। उनके देहांत की खबर पर पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया और शनिवार को उनके पैतृक गांव काठूवास में पूर्ण धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के दौरान प्रदेश की राजनीति से जुड़े कई दिग्गज नेता वहां उपस्थित रहे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी तथा वन मंत्री संजय शर्मा सहित अनेक नेता और जनप्रतिनिधि उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
मां की ममता याद कर भावुक हुए टीकाराम जूली
चलती देवी के प्रति टीकाराम जूली का विशेष भावनात्मक लगाव रहा। वे हमेशा उनकी सेहत को लेकर सजग रहते थे और हर निर्णय में उनकी प्रेरणा का उल्लेख करते रहे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान जब मुखाग्नि की तैयारी चल रही थी, उसी समय जूली अपनी मां की याद में भावुक होकर फूट पड़े। इस दौरान उनके साथ मौजूद अशोक गहलोत, गोविन्द सिंह डोटासरा, भंवर जितेन्द्र सिंह, वासुदेव देवनानी और संजय शर्मा ने उन्हें संभाला और ढांढ़स बंधाया। शोक में डूबे जूली को सांत्वना देने के लिए भारी संख्या में स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
दोनों पुत्रों और पौत्रों ने दी मुखाग्नि
अंत्येष्टि स्थल पर हिंदू परंपरा के अनुसार चलती देवी को अंतिम विदाई दी गई। उनके दोनों पुत्र—टीकाराम जूली और मुकेश जूली—के साथ दोनों पौत्रों ने भी मुखाग्नि देकर दादी को विदाई दी। अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं का सैलाब इस बात का प्रतीक था कि चलती देवी न केवल अपने परिवार में, बल्कि पूरे क्षेत्र में सम्मानित और आस्थापूर्ण स्थान रखती थीं।
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्यपाल का सांत्वना संदेश
चलती देवी के निधन की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं ने टीकाराम जूली से फोन पर संपर्क कर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फोन कर परिवार को ढांढ़स बंधाया और जूली की मां के प्रति श्रद्धांजलि प्रकट की। इसके अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी फोन कर संवेदना प्रकट की। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भी जूली परिवार को अपनी ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की।
अशोक गहलोत ने दी श्रद्धांजलि, कहा—चलती देवी की तपस्या ने गढ़ा परिवार
अंतिम संस्कार के बाद मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने चलती देवी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि चलती देवी की तपस्या, त्याग और संघर्ष ने ही टीकाराम जूली को आज राजनीति के इस बड़े मुकाम तक पहुंचाया है।
गहलोत ने बताया कि एक छोटे से गांव से शुरुआत करते हुए जूली ने जिला परिषद सदस्य के रूप में कार्य किया और आज राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जूली के पिता स्वर्गीय लेखराम ठेकेदार और उनकी मां दोनों ने कठिन परिस्थितियों में परिवार को आगे बढ़ाया और अपने बेटों को मजबूत आधार प्रदान किया।
क्षेत्र में पसरा शोक, ग्रामीणों ने साझा की स्मृतियां
चलती देवी के निधन से पूरे काठूवास में गहरा शोक व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि वे सादगी और अनुशासन का प्रतीक थीं। गांव में उनकी सामाजिक भूमिका और लोगों के प्रति उनके व्यवहार को हमेशा याद किया जाएगा। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उनके जीवन की कई स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि वे हमेशा परिवार को एकजुट रखने का प्रयास करती रहीं और गांव के हर कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं। उनका निधन क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाया सम्मान
अंतिम संस्कार के दौरान प्रदेश के कई उच्च पदस्थ नेताओं की मौजूदगी ने इस बात को और मजबूत किया कि चलती देवी को समाज में कितना सम्मान प्राप्त था। राजनीतिक और सामाजिक वर्गों की एकजुट उपस्थिति से यह भी स्पष्ट हुआ कि टीकाराम जूली का परिवार न केवल राजनीति में, बल्कि सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


