राजस्थान की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया के उदयपुर स्थित डबोक ऑफिस पर गुरुवार को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (CGST) विभाग ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई की। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही और विभाग ने इसे पूरी तरह गोपनीय रखा। सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम ने फर्म से जुड़े दस्तावेजों की जांच के साथ कई दस्तावेज जब्त किए और कर्मचारियों से पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से कर अनियमितताओं और फर्म से जुड़े वित्तीय हिसाब-किताब की जांच के उद्देश्य से की गई है।
सीजीएसटी की यह टीम केआरई अरिहंत नामक फर्म के दफ्तर पहुंची, जिसे कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया के पुत्र आदिश खोड़निया संचालित करते हैं। कार्रवाई के दौरान टीम ने विस्तृत रूप से फाइलें, डिजिटल रिकॉर्ड और खातों से जुड़े डाटा को जांचा। अधिकारियों ने दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की और कई दस्तावेज कब्जे में लिए। साथ ही पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की गई, ताकि सर्च की संपूर्ण प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जा सके। उदयपुर की हिरणमगरी सीजीएसटी टीम के वरिष्ठ अधिकारी इस कार्रवाई में मौजूद रहे और देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा।
कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया न सिर्फ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं, बल्कि डूंगरपुर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक रहा है। उनके भाई नरेंद्र खोड़निया सागवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। परिवार का व्यवसाय भी लंबे समय से राजस्थान और गुजरात क्षेत्रों में फैला हुआ है। उनका ज्वेलरी, रियल एस्टेट और भूमि निवेश से जुड़ा बड़ा कारोबार है, जो सागवाड़ा, उदयपुर और एयरपोर्ट रोड के पास तक विस्तृत है। उदयपुर एयरपोर्ट के आसपास उनके विशाल भूखंड भी चर्चा में रहते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जाती है।
यह पहला मौका नहीं है जब दिनेश खोड़निया के ठिकानों पर किसी केंद्रीय एजेंसी ने छापेमारी की हो। इससे पहले 13 अक्टूबर 2023 को ईडी ने सागवाड़ा स्थित उनके प्रतिष्ठानों पर बड़ी कार्रवाई की थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और उस कार्रवाई को कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा चुनावी माहौल को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में पेश किया था। तब खोड़निया विधानसभा चुनाव के लिए उदयपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। ईडी की उस छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी और कांग्रेस ने इसे प्रतिद्वंद्वी दल द्वारा दबाव बनाने का कदम बताया था।
खोड़निया का नाम अत्यधिक चर्चित मुद्दे, दिसंबर 2022 के आरपीएससी पेपर लीक केस में भी आया था। इस मामले में आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा आरोपी हैं और जांच अभी भी जारी है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई लोगों का नाम कटारा से जोड़कर देखा, जिसमें कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया का नाम भी चर्चाओं में आया था। हालांकि खोड़निया ने उस समय इस तरह के किसी भी संबंध को सिरे से नकारा और स्वयं को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा था कि विपक्ष राजनीतिक लाभ पाने के लिए उनका नाम उछाल रहा है।
उदयपुर में हुई ताजा सीजीएसटी कार्रवाई को लेकर भी दिनेश खोड़निया ने खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक उद्देश्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिस फर्म पर कार्रवाई की गई है, वह फर्म मात्र डेढ़ वर्ष पहले शुरू की गई थी और उस स्थान पर अभी निर्माण कार्य भी चल रहा है। टीम ने जिन दस्तावेजों की मांग की, उन्हें तुरंत उपलब्ध करा दिया गया और तीन से चार घंटे तक विस्तृत पूछताछ और रिकार्ड जांच की गई। खोड़निया के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ईडी और जीएसटी की टीमें उनके प्रतिष्ठानों पर कई बार भेजी जा चुकी हैं, लेकिन हर बार उन्हें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार की जा रही इस प्रकार की कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है और उन्हें निशाने पर लेने का प्रयास है।
राजस्थान की राजनीतिक परिस्थितियों में इस कार्रवाई के अनेक मायने निकाले जा रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे अपने नेताओं को परेशान करने की कोशिश बता रही है, वहीं भाजपा और विपक्षी दल इसे कानूनी कार्रवाई करार दे रहे हैं। राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेताओं पर होने वाली छापेमारियां अक्सर बड़ा राजनीतिक संदेश देती रही हैं और यह कार्रवाई भी उसी कड़ी से अलग नहीं दिखाई देती। सर्च ऑपरेशन के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच अब सीजीएसटी विभाग द्वारा की जा रही है और विभाग की ओर से जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से परहेज किया जा रहा है। जांच अधिकारियों का मानना है कि जब्त किए गए रिकॉर्ड में फर्म के वित्तीय लेनदेन और कर भुगतान से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो अगले चरण में विभागीय नोटिस जारी किए जा सकते हैं।


