शोभना शर्मा। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित CET–2024 परीक्षा की पात्रता अवधि फरवरी 2026 में समाप्त होने जा रही है। पात्रता खत्म होने के बाद करीब 18 लाख अभ्यर्थी सीईटी आधारित भर्तियों की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। यही वजह है कि सीईटी परीक्षा की नई तारीखों को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह सूचना बेहद अहम मानी जा रही है।
बोर्ड के अनुसार सीईटी स्नातक स्तर के 8.78 लाख अभ्यर्थियों की पात्रता 11 फरवरी 2026 तक मान्य रहेगी, जबकि सीनियर सेकेंडरी स्तर के 9.17 लाख अभ्यर्थियों की पात्रता 16 फरवरी 2026 तक ही वैध होगी। इसके बाद पात्रता बनाए रखने के लिए अभ्यर्थियों को नई सीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
20 फरवरी से शुरू होगी CET परीक्षा
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के प्रस्तावित टाइम टेबल के अनुसार सीईटी स्नातक स्तर की परीक्षा 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी। वहीं सीनियर सेकेंडरी स्तर की सीईटी परीक्षा फरवरी 2026 में प्रस्तावित है। बोर्ड की योजना के मुताबिक दोनों ही परीक्षाओं के परिणाम तैयार करने के लिए करीब चार महीने का समय तय किया गया है।
हालांकि, नई सीईटी परीक्षा के आयोजन को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी पात्रता को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, क्योंकि समय पर परीक्षा नहीं होने की स्थिति में लाखों उम्मीदवार भर्तियों से बाहर हो सकते हैं।
इन भर्तियों पर पड़ेगा सीधा असर
सीईटी स्नातक स्तर की परीक्षा के आधार पर राज्य सरकार की कई महत्वपूर्ण भर्तियां आयोजित की जाती हैं। इनमें प्लाटून कमांडर, पटवारी-जिलेदार, जल संसाधन विभाग के पद, कनिष्ठ लेखाकार, तहसील राजस्व लेखाकार, पर्यवेक्षक महिला अधिकारिता, उप जेलर, छात्रावास अधीक्षक ग्रेड-द्वितीय, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी जैसी प्रमुख भर्तियां शामिल हैं।
इसी तरह सीनियर सेकेंडरी स्तर की सीईटी परीक्षा के जरिए वनपाल, छात्रावास अधीक्षक, लिपिक ग्रेड-द्वितीय, कनिष्ठ सहायक, जमादार ग्रेड-द्वितीय और कांस्टेबल जैसे पदों पर भर्ती की जाती है। सीईटी पात्रता समाप्त होने की स्थिति में इन सभी भर्तियों पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों की मांग, बढ़ाई जाए वैलिडिटी
सीईटी को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है। अभ्यर्थी देवेंद्र शर्मा का कहना है कि जब तक नई सीईटी परीक्षा का आयोजन नहीं हो जाता, तब तक पुराने स्कोर कार्ड की वैलिडिटी को बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि परीक्षा में पहले से तय पात्रता अंक में किसी तरह की वृद्धि नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।


